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स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना से रेल परिवहन में आ सकती है क्रांति

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजनादेश की जीवन रेखा भारतीय रेल तमाम चुनौतियों से जूझ रही है। भारी भरकम योजनाओं का आर्थिक बोझ और व्यस्ततम रेल मार्गों पर लगभग 22 हजार यात्री ट्रेनों व मालगाड़ियों के रोजाना संचालन से रेलवे की रफ्तार थम सी गई है। यात्रियों के लिए महीनों लंबी आरक्षण सूची और प्रतिदिन अधिकांश ट्रेनों के विलंब से चलने से लाखों लाख यात्री जूझ रहे हैं। रेल पटरियों पर लगातार ट्रेनों की आवाजाही से कमजोर हो रही पटरियों के मरम्मत व रखरखाव का पूरा समय न मिलने से भीषण रेल दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। इन तमाम समस्याओं और चुनौतियों का समाधान डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर कारपोरेशन आफ इंडिया लि. (डीएफसीसीआईएल) से ही होगा… अर्थात दिल्ली-मुंबई, चेन्नई-हावड़ा को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना रेल यात्रा व माला भाड़ा ढुलाई ही नहीं देश की पूरी परिवहन व्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।

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इंतजार खत्म, अब देश में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

करीब 125 करोड़ आबादी वाले इस देश की अधिकांश जनता के लिए बुलेट ट्रेन एक सपना है जिसे हमने अब तक तस्वीरों में कभी जापान में तो कभी चीन में दौड़ते हुए देखा है। लेकिन अब यह सपना हकीकत में बदलने वाला है। कुछ ही साल में देश की पहली बुलेट ट्रेन पटरियों पर हवा से बातें करती दिखाई देगी।

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विश्‍व पर्यटन का केन्‍द्र बनने की ओर अग्रसर भारत

‘‘एक ऐसी जगह जिसे सभी लोग देखना चाहते हैं और एक बार इसके दर्शन कर लेने के बाद, भले ही उन्‍होंने इसकी केवल झलक भर देखी हो, दुनिया की तमाम छवियों को इस एक झलक पर न्‍योछावर करने को तैयार हों’’—ये पंक्तियां हैं मार्क ट्वेन की जो उन्‍होंने भारत के बारे में लिखी थीं।

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