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'कैंसर हमसे बढ़कर नहीं'

विश्वभर के कैंसर संबंधी वर्ष 2012 के आंकड़ों में कैंसर के 1.41 करोड़ नए मामले सामने आने और कैंसर से 82 लाख मौत होने का अनुमान है। 

एक अनुमान के अनुसार वैश्विक जनसंख्या में वृद्धि होने और लोगों पर बढ़ती उम्र के प्रभाव के कारण वर्ष 2025 तक कैंसर के नए मामले बढ़कर 1.93 करोड़ हो जाएंगे। वर्ष 2012 में सभी प्रकार के कैंसर के आधे से अधिक मामले (56.8 प्रतिशत) और कैंसर से मौतें (64.9 प्रतिशत) विश्व के अल्पविकसित क्षेत्रों में हुए और वर्ष 2025 तक इन आंकड़ों के और भी अधिक बढ़ने के संकेत हैं।

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में मिथक है कि यह जीवन का अंत है। ऐसी स्थिति में जब भारत के साथ-साथ विश्व के कई अन्य देश विनाशकारी कैंसर से खतरा महसूस कर रहा है, हमें मुख्य रूप से कैंसर के प्रति जागरूकता और रोकथाम की ओर ध्यान देना चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए, प्रतिवर्ष 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस आयोजित किया जाता है, जो कैंसर की रोकथाम करने, उसका पता लगाने और उपचार करने के प्रयासों को बढ़ावा दिया जा सके। वर्ष 2011 में संयुक्त राष्ट्र ने एक विश्व कैंसर घोषणापत्र लागू किया था, जिसमें बीमारी के बारे में 'नुकसानदायक मिथकों और गलतफहमियों को दूर करना' मुख्य रूप से शामिल किया गया था। पिछले वर्ष यानी 2014 में विश्व कैंसर दिवस का नारा 'मिथक हटाओ' के अधीन कैंसर के बारे में नुकसानदायक मिथकों और गलतफहमियों को दूर करने पर जोर दिया गया था। एक वर्ष के बाद, वर्ष 2015 में इसका नारा बदल गया है। इस वर्ष विश्व कैंसर दिवस का नारा है-  'हमसे बढ़कर नहीं'।

विश्व कैंसर दिवस 2015 से हमें इस बात की उम्मीद है कि कैंसर से लड़ने के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी। इस वर्ष का मूल विषय इस बात पर जोर देगा कि कैंसर के समाधान मौजूद हैं और वे हमारी पहुंच से बाहर नहीं हैं, बल्कि वे सबके लिए काफी अधिक पहुंचयोग्य हैं। इसलिए कैंसर हमसे बढ़कर नहीं है।

चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (सीएनसीआई) का गौरवमय इतिहास रहा है क्योंकि महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, देशबंधु चितरंजनदास और डॉ. विधानचंद्र राय जैसी महान हस्तियां इस संस्थान से जुड़ी रही हैं। इस संस्थान के संस्थापक निर्देशक और ख्याति प्राप्त महिला कैंसर विशेषज्ञ डॉ. सुबोधचंद्र मित्रा ने कैंसर के उपचार के लिए एक केन्द्र के रूप में चिरंजन कैंसर अस्पताल (सीसीएच) की आधारशिला रखी।

इस संस्थान का उद्घाटन औपचारिक रूप से नोबल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मैडम जे. क्यूरी ने 12 जनवरी, 1950 में किया और देशबंधु चितरंजन दास के नाम पर इसका नामकरण किया गया। चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान केन्द्र (सीएनसीआरसी) में आधारभूत अनुसंधान का कार्य 1957 में शुरू हुआ। बाद में सीसीएच और सीएनसीआरसी दो अलग निकायों को मिलाकर 1987 में सीएनसीआई बनाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रमुख क्षेत्रीय कैंसर केन्द्र के रूप में कार्य करना था। वर्तमान सीएनसीआई भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है। यह इकलौता क्षेत्रीय कैंसर केन्द्र है जहां पर पिछले 60 वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी देशों के लोगों का इलाज किया जा रहा है। इस संस्थान के लिए भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार निश्चित अनुपात में धनराशि प्रदान करती है। सीएनसीआई की रूपलाल नंदी मेमोरियल कैंसर अनुसंधान केन्द्र (आरएनएमसीआरसी) चन्दन नगर में एक और शाखा है, जहां इसके आस-पास के क्षेत्रों के मरीजों के इलाज किया जाता है।

आज सीएनसीआई इलाज और अनुसंधान गतिविधियों के लिए बेहतर केन्द्र है। इस अस्पताल में केवल कैंसर के मरीजों का इलाज किया जाता है। गरीबी रेखा से नीचे के मरीजों के लिए अस्पताल में मुफ्त इलाज किया जाता है। बड़ी संख्या में लोगों को भारत सरकार के राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) योजना से कीमोथेरेपी के लिए दवाई भी दी गई है। कैंसर से पीड़ित बच्चों की विशेष देखभाल के लिए जल्द ही एक पीडिएट्रिक आंकोलॉजी वार्ड शुरू किया जाएगा। कैंसर के मरीजों के लिए 6 मार्च, 2009 को एक नई डे-केयर इकाई शुरू की गई। दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीज और उनके परिजनों के लिए एक रात्रि आश्रय स्थल और शौचालय भी है।

सीएनसीआई के अनुसंधान प्रकोष्ठ में कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में प्रसिद्ध उच्च शिक्षित और कुशल वैज्ञानिक है। अस्पताल का अनुसंधान विभाग आधुनिक और उच्च तकनीक के उपकरण है। सीएनसीआई में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से चिकित्सीय परीक्षण किए जाते हैं।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रों में सीएनसीआई के करीब 50 पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। कुछ अनुसंधान कार्य आईपीआर द्वारा पेटेंट की गई है। प्रति वर्ष देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से छात्र गर्मियों में यहां आते हैं, जिन्हें अनुसंधान प्रकोष्ठ के जाने माने वैज्ञानिक प्रशिक्षण देते हैं। सीएनसीआई ने कोलकाता के न्यू टाऊन राजार हाट में 10 एकड़ भूमि पर कैंसर के बेहतर इलाज की सुविधा के साथ 500 बिस्तरों वाले अस्पताल भवन का निर्माण शुरू किया है। आधारभूत और चिकित्सीय कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार प्रगति की अवधारणा के साथ सीएनसीआई अस्पताल बेहतर भविष्य के लिए कार्य कर रहा है, ताकि कैंसर के मरीज अधिक प्रभावी तरीके और आधुनिक इलाज के जरिये इस बीमारी को मात दे सके।

(लेखक चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में निदेशक सर्जीकल ऑन्कोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी तथा ट्रांसलेशनल रिसर्च के प्रमुख हैं)

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