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अगले दो महीनों में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान

दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तरार्द्ध (अगस्त से सितंबर) में पूरे देश में बारिश सामान्य से अधिक (एलपीए के 106 फीसदी से अधिक) होने का अनुमान है और इसकी 55 फीसदी संभावनाएं हैं। जबकि, पूरे देश में मानसून सीजन के उत्तरार्द्ध में वर्षा एलपीए का 107% होने की संभावना है, जो 8% कम या अधिक हो सकती है।नई दिल्ली : दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तरार्द्ध (अगस्त से सितंबर) में पूरे देश में बारिश सामान्य से अधिक (एलपीए के 106 फीसदी से अधिक) होने का अनुमान है और इसकी 55 फीसदी संभावनाएं हैं। जबकि, पूरे देश में मानसून सीजन के उत्तरार्द्ध में वर्षा एलपीए का 107% होने की संभावना है, जो 8% कम या अधिक हो सकती है।

अगस्त के दौरान वर्षा जून में किए गए पूर्वानुमान के अनुरूप ही एलपीए का 104 फीसदी होने की संभावना है, जो 9% कम या अधिक हो सकती है।

देशभर में पूरे मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान वर्षा जून में किए गए पूर्वानुमान के अनुरूप ही एलपीए का 106% होने की संभावना है, जो 4% कम या अधिक हो सकती है।

भारतीय मौसम विभाग ने वर्ष 2016 के जून-जुलाई के दौरान हुई वर्षा पर ताजा आंकड़े भी जारी किए हैं। इस साल जून माह के दौरान दक्षिण पश्चिम मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत से 11% कम रही, हालांकि, जुलाई में हुई बारिश लंबी अवधि के औसत से 7% अधिक रही।

उत्तर-दक्षिण क्षेत्र में शामिल राज्यों और मौसम उप प्रभागों, जैसे-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ, मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र, उत्तरी तटवर्ती कर्नाटक, रायलसीमा और तमिलनाडु में जुलाई 2016 के दौरान व्यापक मात्रा में बारिश हुई है। जुलाई 2016 के दौरान हुई वर्षा ने जून के दौरान दर्ज की गई कम वर्षा के आंकड़े को खत्म कर दिया है क्योंकि मानसून सीजन के पूर्वार्द्ध (जून-जुलाई) में हुई कुल बारिश सामान्य रही है और इस दौरान एलीपीए से विचलन शून्य फीसदी रहा है।

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 1970 से अब तक के 46 वर्षों में से 34 वर्षों के दौरान जुलाई महीने में हुई बारिश एलपीए के 100% से कम रही है। पिछले 10 वर्षों के दौरान साल  2013 और 2010 के बाद साल 2016 एकमात्र ऐसा वर्ष रहा है जब जुलाई महीने में वर्षा एलपीए के 100% से अधिक रही है।

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