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बेहतर जल प्रबंधन है आज की जरूरत

कहा गया है कि जल ही जीवन है। जल प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। कहने को तो पृथ्वी चारों ओर से पानी से ही घिरी है लेकिन मात्र 2.5% पानी ही प्राकृतिक स्रोतों - नदी, तालाब, कुओं और बावड़ियों-से मिलता है जबकि आधा प्रतिशत भूजल भंडारण है। 97 प्रतिशत जल भंडारण तो समुद्र में है। लेकिन, यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि भारत जल संकट वाले देशों की सूची में मुहाने पर खड़ा है।

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गंगा स्वच्छता अभियान : उम्मीद से कम हो रहा है काम

गंगा स्वच्छता अभियान : उम्मीद से कम हो रहा है कामदेश की सबसे सम्मानित और राष्ट्रीय नदी गंगा अपना अस्तित्व बचाने के लिए चुनौतियों का सामना कर रही है। गंगा के अस्तित्व पर यह संकट बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिकीकरण की वजह से पैदा होने वाले सीवेज, व्यापारिक प्रदूषण व अन्य प्रदूषणों की वजह से हुआ है।

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रेत में स्नान कर यमुना मैया की दुर्दशा पर जताया रोष

रेत में स्नान कर यमुना मैया की दुर्दशा पर जताया रोषआगरा : बिन पानी भी भला कोई जिंदगी हो सकती है? यमुना मैया की वर्तमान स्थिति देखें तो आप जवाब देने में लड़खड़ा जाएंगे। पानी की जगह यहां नालों की कीचड़, पॉलीथिन की गंदगी और शौच करते लोग नजर आएंगे। यमुना मैया की इस दुर्दशा पर यहां लोगों ने पानी की जगह रेत में स्नान कर रोष जताया। इसके उपरान्त हर रोज की तरह आरती की गई।  

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अनिल माधव दवे : एक ऐसे मंत्री जिन्हें थी पर्यावरण की गहरी समझ

अनिल माधव दवे : एक ऐसे मंत्री जिन्हें थी पर्यावरण की गहरी समझ

अनिल माधव दवे  (61) का 18 मई को नई दिल्‍ली में हृदयघात से निधन हो गया। पर्यावरणविद, विशेष रूप से नदी संरक्षण कार्यकर्ता, लेखक, शौकिया पायलट और संसद सदस्‍य दवे ने जुलाई 2016 में केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री बनने से पहले कई क्षेत्र में कार्य किए थे।

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