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Samiksha Bharti News Service

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इंदिरा गांधी और देशप्रेम की राह

इंदिरा गांधी और देशप्रेम की राहबात तब की है जब इंदिरा गांधी बहुत छोटी बच्ची थीं। उन दिनों देश में विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार की लहर थी। जगह-जगह विदेशी वस्त्रों की होली जलाई जा रही थी। घऱ में बड़ों की देखा-देखी उस छोटी सी बच्ची ने भी विदेशी वस्त्र पहनना छोड़ दिया।

लाल बहादुर शास्त्री ने ऐसे दिया घोटाला न होने का सबूत

लाल बहादुर शास्त्री ने ऐसे दिया घोटाला न होने का सबूतएक बार राज्यसभा में एक उद्योगपति सदस्य ने शिकायत के लहजे में कहा कि नेहरू स्मारक कोष में जमा किए जा रहे धन के बारे में कई शिकायतें सुनने में आ रही हैं। उन्होंने इसे एक घोटाला करार देते हुए जोरदार शब्दों में इसकी निंदा की और जांच के लिए अपील की।

नींव का पत्थर ही बने रहना चाहते थे लाल बहादुर

नींव का पत्थर ही बने रहना चाहते थे लाल बहादुरबात उन दिनों की है जब लालबहादुर शास्त्री ने इलाहाबाद के सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया ही था और जन सेवा का काम बड़ी रुचि के साथ करने लगे थे। वह एक कर्तव्यनिष्ठ स्वयंसेवक थे। अखबारी प्रचार-प्रसार में उनका ज्यादा विश्वास नहीं था।

मिशन शक्ति से जुड़ी सात बातें जो आपको पता नहीं थीं

मिशन शक्ति से जुड़ी सात बातें जो आपको पता नहीं थींबीते दिनों भारत द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किए गए मिशन शक्ति के बारे में हम यहां आपको वे सात बातें बता रहे हैं जो शायद आपको अभी तक मालूम नहीं होंगी।

जब निराला का सामना हुआ भिखारिन से

जब निराला का सामना हुआ भिखारिन सेमहाकवि निराला का जीवन निष्कपट था। जैसा वह कहते थे, वही उनका आचरण था, बाहर-भीतर एक समान। उनके जीवन के ऐसे अनेक प्रसंग हैं जब उन्होंने दीन-दुखियों के आगे अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

वेबफेअर का 11वां आयोजन रविवार को पुणे में

वेबफेअर का 11वां आयोजन रविवार को पुणे मेंरविवार शाम को पुणे के 91स्प्रिंगबोर्ड येरवदा सभागार में होने वाले वेबफेअर के 11वें आयोजन में आईटी बाजार में चल रही कई गतिविधियों पर चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा।

जब रामकृष्ण परमहंस जार-जार रोए

जब रामकृष्ण परमहंस जार-जार रोएस्वामी रामकृष्ण परमहंस करुणा, दया और स्नेह की मूर्ति थे। इसके चलते उनका व्यवहार कभी-कभी बेहद विचित्र जान पड़ता है। एक बानगी देखिए।

हम सबके अंदर प्रकाश विद्यमान है...

हम सबके अंदर प्रकाश विद्यमान है...बात उस समय की है जब भगवान बुद्ध मृत्यु शैया पर पड़े थे। पास में बैठा हुआ उनका शिष्य आनंद उनकी सेवा कर रहा था। तभी, उनका एक दूसरा शिष्य भद्रक वहां रोते हुए आया।

अपने अंदर के साहस को हमेशा संभालकर रखें

अपने अंदर के साहस को हमेशा संभालकर रखेंबाल गंगाधर तिलक से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं। आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी एक ऐसी घटना सुना रहे हैं, जिसके जरिए हम उनसे अपने साहस को संभालने का हुनर सीख सकते हैं।

बड़ा दयालु है भगवान...

बड़ा दयालु है भगवान...भगवान हमारी मुसीबतों को कई बार बेहद हल्का करके हमें उबार लेता है। लेकिन, हम उसके शुक्रगुजार होने के बजाय उसी पर दोषारोपण करने में लगे रहते है। जबकि, हम वही काट रहे होते हैं जो हमने बोया है। इसी नजरिये को समझाते हुए हम यहां आपको यह कहानी सुना रहे हैं।

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