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प्रदर्शनकारी कलाओं में महिलाओं के मुद्दों पर सम्मेलन, स्त्रियों की भूमिका पर हुआ मंथन

प्रदर्शनकारी कलाओं में महिलाओं की पहचान, मुद्दे एवं विवेचन विषय पर पिछले दिनों मुंबई में एक दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का आयोजन मणिबेन नानावती महिला महाविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र एवं हिंदी विभाग तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था।

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कार्यस्थल पर समानता हासिल करने के लिए महिलाओं की जद्दोजहद

कार्यस्थल

यद्यपि कार्यस्थल की दुनिया एवं माहौल महिलाओं के लिए तेज़ी से बदल रहा है, इसके बावजूद, महिलाओं के लिए ‘कार्यस्थल पर समानता’ हासिल करने के लक्ष्य को पाने के लिए अभी हमें लंबी दूरी तय करनी है। हमें महिलाओं के वेतन, अवकाश, विशेषरूप से भुगतान सहित मातृत्व एवं शिशु देखभाल अवकाश, परिवार एवं बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए विशेष अवकाश, गर्भावस्था के दौरान संरक्षण, स्तनपान कराने वाली महिलाओं की स्थिति के प्रति संवेदनशीलता और कार्यस्थल पर होने वाले यौन शोषण के क्षेत्र में महिलाओं के लिए पूर्ण समानता की ओर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। (Read in English)

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समानता की ओर अग्रसर आधी आबादी...

समानता की ओर अग्रसर आधी आबादी...  

मंगलयान मिशन और एक साथ लॉन्च किए गए 104 उपग्रहों को लेकर भारतीय महिला वैज्ञानिकों के योगदान की प्रशंसा न केवल भारत द्वारा की जा रही है बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय महिला वैज्ञानिकों की सराहना हो रही है। डॉ. केसी थॉमस, एन वलारमती, मिनाल संपथ, अनुराधा टीके, रितू करिधल, मोमिता दत्ता और नंदनी हरिनाथ जैसे वैज्ञानिकों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।

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समर्पण, विश्वास और प्रेरणा के लिए मिशाल बनीं ये महिलाएं...

प्राचीन काल से ही भारतीय इतिहास में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। हमें पता है कि वैदिक या उपनिषद् युग में मैत्रेयी, गार्गी और अन्य महिलाओं ने ब्रह्म के ऊपर विचार करने की योग्यता के आधार पर ऋषियों का स्थान प्राप्त किया था। हजारों ब्राह्मणों की उपस्थिति में विदुषी गार्गी ने ब्रह्म के ऊपर शास्त्रार्थ करने की चुनौती याज्ञवल्क्य को दी थी।

प्राचीन काल से ही भारतीय इतिहास में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। हमें पता है कि वैदिक या उपनिषद् युग में मैत्रेयी, गार्गी और अन्य महिलाओं ने ब्रह्म के ऊपर विचार करने की योग्यता के आधार पर ऋषियों का स्थान प्राप्त किया था। हजारों ब्राह्मणों की उपस्थिति में विदुषी गार्गी ने ब्रह्म के ऊपर शास्त्रार्थ करने की चुनौती याज्ञवल्क्य को दी थी।

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