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हम सबके अंदर प्रकाश विद्यमान है...

हम सबके अंदर प्रकाश विद्यमान है...

हम सबके अंदर प्रकाश विद्यमान है...बात उस समय की है जब भगवान बुद्ध मृत्यु शैया पर पड़े थे। पास में बैठा हुआ उनका शिष्य आनंद उनकी सेवा कर रहा था। तभी, उनका एक दूसरा शिष्य भद्रक वहां रोते हुए आया।

रोने की आवाज महात्मा बुद्ध के कानों में पड़ी तो उन्होंने पूछा कि कौन रो रहा है? आनंद ने उन्हें भद्रक के रोने के बारे में बताया तो बुद्ध ने उसे बुला भेजा।

कक्ष में प्रवेश करते ही भद्रक उनके पैरों में गिरकर और जोर से रोने लगा। महात्मा बुद्ध ने उससे रोने का कारण पूछा तो भद्रक ने कहा कि महामन जब आप हमारे बीच नहीं रहेंगे तो हमें प्रकाश कौन दिखाएगा?

बुद्ध ने स्नेह से उसके सिर पर हाथ रखते हुए कहा कि प्रकाश तो तुम्हारे अंदर है, इसे बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं है। जो अज्ञानी इसे ढूंढने के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं, उनके हाथ में अंत समय निराशा ही लगती है। इसके विपरीत मन, कर्म और विचार से जो लोग एकनिष्ठ होकर साधना करते हैं, उनका अंत:करण स्वयं ही दीप्त हो उठता है। इसलिए, अपने दीपक स्वयं बनो।

यह महात्मा बुद्ध का सबसे अंतिम संदेश था। इसी के प्रचार के लिए उन्होंने अपने समूचे जीवन का उत्सर्ग कर दिया।

Last modified onThursday, 28 March 2019 20:56
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