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प्रदर्शनकारी कलाओं में महिलाओं के मुद्दों पर सम्मेलन, स्त्रियों की भूमिका पर हुआ मंथन

प्रदर्शनकारी कलाओं में महिलाओं की पहचान, मुद्दे एवं विवेचन विषय पर पिछले दिनों मुंबई में एक दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का आयोजन मणिबेन नानावती महिला महाविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र एवं हिंदी विभाग तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था।

'भारतीय शास्त्रीय थियेटर एवं नृत्य में महिलाएं' सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. नरेंद्र मोहन ने विभिन्न सन्दर्भों के सहारे प्राचीन काल से प्रदर्शनकारी कला में स्त्रियों की प्रभावकारी भूमिका को रेखांकित करते हुए समकालीन महिला कलाकारों के योगदानों की चर्चा की।

संगोष्ठी के पहले दिन मंगलवार को सम्मेलन का उद्घाटन सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक लीना यादव एवं अहमदाबाद के डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अमी उपाध्याय ने किया। प्रो. उपाध्याय ने बीज वक्तव्य में स्त्री पहचान के संकट, अस्मिता और उसकी सृजनात्मकता पर बहसतलब चर्चा करते हुए प्रदर्शनकारी कलाओं में महिला भागीदारी और उसके अवदान पर सुचिंतित प्रकाश डाला।

एक महत्वपूर्ण सत्र में 'भारतीय सिनेमा में स्त्री' विषय पर गम्भीर चर्चा हुई। रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एवं सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. रोहिणी अग्रवाल ने विश्व सिनेमा और बॉलीवुड में स्त्री कलाकारों की चुनौतियों और सफलता पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया। इस सत्र में टाटा सामाजिक विज्ञान केंद्र की प्रो. विभूति पटेल तथा सुपरिचित लेखिका मधु कांकरिया आदि ने भी स्त्री सिनेमा के विविध पक्षों को रेखांकित किया।

कनाडा सरकार के कॉन्सुल एवं निदेशक डोमिनिक मर्कोटे इस आयोजन के मुख्य अतिथि थे। एक अन्य सत्र 'महिला कलाकार-अंतर्सांस्कृतिक आवाज' की अध्यक्षता सिंगापुर के ग्लोबल हिंदी फाउंडेशन की संस्थापक ममता मंडल ने की। दिल्ली से सुप्रसिद्ध नाट्य लेखक डॉ. भारतेंदु मिश्र, रंगकर्मी डॉ. वसुधा सहस्रबुद्धे, प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना डॉ. विजया शर्मा, कथक गुरु राजश्री शिर्के, सुदर्शन टीवी मीडिया अकादमी के डीन प्रमोद कुमार पांडेय, गोवा की लेखिका एवं कलाकार डॉ. रूपा चारी आदि ने महत्वपूर्ण भागीदारी की एवं विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।

समापन सत्र में एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. शशिकला वंजारी ने स्त्री कलाकारों के जीवन के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने लोक गीतों में स्त्री कलाकारों की अभिव्यक्ति पर सार्थक वक्तव्य दिया। मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अरुणा राजे ने स्त्री कलाकारों के जीवन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला।

तकनीकी समान्तर सत्रों में हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी में विभिन्न राज्यों से पधारे प्रतिभागियों ने प्रदर्शनकारी कलाओं में स्त्री सम्बन्धी विविध विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। इसमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, छतीसगढ़, मध्यप्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, हरियाणा और  नेपाल, सिंगापुर, क्यूबैक आदि स्थानों से प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी एवं गंभीर बहस-विमर्श और संवाद किया।

सम्मेलन का संयोजन मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं पत्रकरिता-जनसंचार के संयोजक डॉ. रवींद्र कात्यायन एवं अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. हर्षदा राठौड ने की। आभार प्रकाश महिला अध्ययन केंद्र की प्रभारी प्रेरणा रामटेके ने किया।

डॉ. सुधीर सोनी, संजय गौड़, डॉ सुधीर शर्मा, प्रो. अलका पांडेय, आलोक लम्साल आदि अनेक लेखकों, संस्कृतिकर्मियों, प्राध्यापकों, कलाकारों, शोधार्थियों आदि की भी उल्लेखनीय भूमिका रही।

Last modified onTuesday, 22 January 2019 19:12
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