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पौष महीने की सकट चतुर्थी का विधि विधान

पौष महीने की सकट चतुर्थी का विधि विधान

पौष महीने की सकट चतुर्थी का विधि विधान पौष महीने में मनाए जाने वाली सकट चतुर्थी के त्योहार को संतान की लंबी आयु प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा होती है।

इस त्योहार का विशिष्ट पकवान तिलकुट है। तिलकुट कच्चे तिल को गुड़ में कूटकर बनाते हैं। इसे तिलकुटा भी कहा जाता है।

भोजन के अंतर्गत तेल में सिंकने वाले पकवान बनाए जाते हैं, जैसे कचौड़ी, मंगोड़े, चीले, बाजरे के आटे और की गुड़ की टिकिया इत्यादि।

पूजा विधि

एक चकले पर चंदन से देवता की तस्वीर काढ़ते हैं। एक दीपक जलाया जाता है। एक बरतन में पानीतिलकुटचार या आठ कचौड़ी रखी जाती हैं। पूजा के बाद सकट की कहानी सुनते हैं। पूजा करके भोजन किया जाता है। कहीं-कहीं पर यह त्योहार दिन में तो कहीं यह रात में मनाया जाता है। रात के वक्त चन्द्रमा की पूजा करते हैं। लेकिन जहां दिन में यह त्योहार मनाया जाता हैं, वहां भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। 

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