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जब विनोबा ने छोटे से फावड़े के जरिए दिया बड़ा संदेश

जब विनोबा ने छोटे से फावड़े के जरिए दिया बड़ा संदेशआचार्य विनोबा भावे स्थायी रूप से पवनार आश्रम में रहते थे। हरिजन सेवा और ग्राम स्वच्छता कार्यक्रम के सिलसिले में वह आश्रम से करीब तीन मील दूर स्थित सुरगांव नाम के एक गांव में बहुत दिनों तक आते-जाते रहे। इस दौरान उनका फावड़ा हमेशा उनके साथ ही रहता था।

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जब स्वामी विवेकानंद ने पहन रखे थे विदेशी जूते

जब स्वामी विवेकानंद ने पहन रखे थे विदेशी जूतेस्वामी विवेकानंद के अमेरिका प्रवास के दौरान एक दिन वह बगीचे में टहल रहे थे। तभी एक स्थानीय महिला की नजर उन पर पड़ी। उसने स्वामी जी को गौर से देखा और फिर तंज कसते हुए बोली कि यदि आप अन्यथा न लें तो आप से एक सवाल पूछूं?

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असली स्वयंसेवक थे राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन

असली स्वयंसेवक थे राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडनहिंदी साहित्य सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशन का आयोजन दिल्ली में हो रहा था। इसके चलते काफी साहित्यिक लोगों का वहां जमावड़ा लगा हुआ था। उसी आयोजन में अध्यक्ष महोदय का जुलूस निकलना था लेकिन अध्यक्ष यानी राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का कोई अता-पता नहीं था।

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यूं सत्य का अनुसरण करते थे बापू

यूं सत्य का अनुसरण करते थे बापूमहात्मा गांधी द्वारा सत्य के अनुसरण की तमाम मिसालें दी जाती हैं। हमेशा सत्य का पालन करने की एक ऐसी ही घटना तब घटी जब वह नौवीं कक्षा में पढ़ते थे।

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