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‘स्वच्छ भारत’ ही होगा गांधी को जन्मदिन का गिफ्ट

सार्वजनिक स्‍वच्‍छता एक ऐसा विषय था, जिसके बारे में महात्‍मा गांधीजी की जीवन पर्यन्‍त गहरी दिलचस्‍पी रही। गांधीजी ने भारतीयों को स्‍वच्‍छता के महत्‍व के बारे में प्रेरित करने के लिए अपने जीवन का महत्‍वपूर्ण समय समर्पित किया और इस महत्‍वपूर्ण मुद्दे की ओर राष्‍ट्र की चेतना को जगाने का प्रयास किया। यह बहुत महत्‍वपूर्ण है कि गांधीजी का प्रकाशित साहित्‍य पूरी तरह सार्वजनिक स्‍वच्‍छता के मुद्दे की ओर महत्‍वपूर्ण ध्‍यान देने के लिए समर्पित है। इसमें सत्याग्रह, अहिंसा और खादी पर समान रूप से ध्‍यान केन्द्रित किया गया है।

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गांधी का सहकार सपना साध सकता है उद्यमिता का ध्येय

गांधी का सहकार सपना साध सकता है उद्यमिता का ध्येय

यह महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष है। सूदूर चम्पारण में निल्हे कोठी के किसानों को अंग्रेजों ने व्यापार की सफलता के लिए दास बना रखा था। अप्रैल 1917 में गांधी ने मोतिहारी पहुंचकर किसानों की दासता से मुक्ति का बिगुल फूंका। उसकी धमक से अपराजेय अंग्रेजों की सल्तनत हिल गई। आखिरकार चम्पारण सत्याग्रह के 30 वर्ष बाद अग्रेजों को बोरिया बिस्तर बांधकर जाने को विवश होना पड़ा। 

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चंपारण सत्‍याग्रह के सौ साल...

भारत में महात्‍मा गांधी के प्रथम सत्‍याग्रह की शताब्‍दी को इस माह अप्रैल में मनाया जा रहा है। इसका शुभांरभ उत्‍तरी बिहार के पूर्व में अविभाजित चंपारण जिले से किया गया था। गांधीजी ब्रिटिश स्‍टेट मालिकों के द्वारा जिले के किसानों के खिलाफ बढ़ते हुए दुर्व्‍यवहार की जानकारी मिलने पर अप्रैल 1917 को वहां गए थे। चंपारण के किसानों ने गांधीजी को जानकारी दी कि वे अपनी भूमि के प्रत्‍येक 20 हिस्‍सों में से तीन पर अपने भूमि मालिकों के लिए खेती करने के कानून से बंधे हैं। इस व्‍यवस्‍था को तिनकथिया कहा जाता था।

भारत में महात्‍मा गांधी के प्रथम सत्‍याग्रह की शताब्‍दी को इस माह अप्रैल में मनाया जा रहा है। इसका शुभांरभ उत्‍तरी बिहार के पूर्व में अविभाजित चंपारण जिले से किया गया था। गांधीजी ब्रिटिश स्‍टेट मालिकों के द्वारा जिले के किसानों के खिलाफ बढ़ते हुए दुर्व्‍यवहार की जानकारी मिलने पर अप्रैल 1917 को वहां गए थे। चंपारण के किसानों ने गांधीजी को जानकारी दी कि वे अपनी भूमि के प्रत्‍येक 20 हिस्‍सों में से तीन पर अपने भूमि मालिकों के लिए खेती करने के कानून से बंधे हैं। इस व्‍यवस्‍था को तिनकथिया कहा जाता था। (Read in English)

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साल दर साल और प्रासंगिक हो रहे हैं महात्मा गांधी...

30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी जब दैनिक प्रार्थना के लिए जा रहे थे तब वह गोली लगने से शहीद हो गए। वह भौतिक रूप से हमें छोड़ गए लेकिन उनकी शिक्षा, उनके निजी जीवन के तमाम प्रयोग, राजनीति और दर्शन आज भी भारत के और दूसरे देशों के लोगों के मस्तिष्क में ताजा हैं।

30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी जब दैनिक प्रार्थना के लिए जा रहे थे तब वह गोली लगने से शहीद हो गए। वह भौतिक रूप से हमें छोड़ गए लेकिन उनकी शिक्षा, उनके निजी जीवन के तमाम प्रयोग, राजनीति और दर्शन आज भी भारत के और दूसरे देशों के लोगों के मस्तिष्क में ताजा हैं।

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‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश है…’

महात्मा गांधी ने अपने जीवन दर्शन को

महात्मा गांधी ने अपने जीवन दर्शन को "मेरा जीवन ही मेरा संदेश है" से व्यक्त किया है। उनका विविध और सक्रिय व्यक्तित्व सत्य और सिर्फ सत्य पर ही आधारित था। अहिंसा इनके जीवन का दूसरा सबसे बड़ा सिद्धांत था। (Read in English)

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वैश्विक जीवन एवं निरंतरता पर गांधीवादी दृष्टिकोण

वैश्विक जीवन एवं निरंतरता पर गांधीवादी दृष्टिकोण

आधुनिकीकरण ने एक व्यक्ति के सामर्थ्य को वैश्विक रूप प्रदान किया है। उपग्रह संचार, वायु मार्गों एवं भारी जमीनी उपकरणों के साथ अब हमारी शक्ति और क्षमता वैश्विक हो गई है। अल्फ्रेड नार्थ वाइटहेड के शब्दों में आज का व्यक्ति जो भी बना है उसमें सम्पूर्ण दुनिया का उदय और सम्मिलन शामिल है। मानव जीवन ने विश्वरूप हासिल कर लिया है।

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गांधीजी ने यूं अपनाई धोती...

गांधीजी ने यूं अपनाई धोती...

करीब 95 वर्ष पहले गांधीजी ने 22 सितम्बर 1921 को अपने पहनावे में परिवर्तन करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। एक सुपरिष्कृत गुजराती पहनावे के स्थान पर उन्होंने केवल एक साधारण धोती एवं शॉल पहनने का फैसला किया। (Read in English)

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