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बाबा - भक्त संवाद : पेट्रोल की मार, कौनसी सरकार है जिम्मेदार!

बाबा - भक्त संवाद : पेट्रोल की मार, कौनसी सरकार है जिम्मेदार!

बाबा : भक्त, एक बात का जवाब दे क़ि जब पिछले दो साल से पेट्रोल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इतनी कम है, तब भी अपने देश में पेट्रोल इतना महंगा क्यों है?

भक्त : अरे बाबा, आपको इतना भी नहीं पता क्या? सरकार इस पेट्रोल के पैसे के अंतर से देश का राजकोषीय घाटा समाप्त कर रही है। अर्थशास्त्र पढ़ा करो बाबा...

बाबा : हम्म, मगर ऐसा ही अर्थशास्त्र जब मैं तुझे साल 2012-13 में बताता था, तो तब तू नहीं मानता था।

भक्त : बाबा, देखो वह सरकार ही निकम्मी थी, पेट्रोल भले ही तब अंतर्राष्ट्रीय रूप से महंगा हो मगर उसे देश के लिए सस्ता तो करना ही चाहिए था न...।

बाबा : लगता है तेरा अर्थशास्त्र फिर से हिल गया। यह सरकार तो अब सस्ता होने पर भी, सस्ता नहीं कर रही है।

भक्त : बाबा बोला न…, 'फिस्कल डेफिसिट' और तुम हिंदी वालों के लिए राजकोषीय घाटा, जाओ कुछ पढ़ो…।

बाबा : अच्छा! तब यह राजकोषीय घाटा तो पिछली सरकार में भी बहुत था और इस सरकार ने राजकोषीय घाटे के लिए पहले ही इतने टैक्स लगा रखे हैं तो अब पेट्रोल का फायदा हम तक क्यों नहीं पहुचाया जा रहा? यानी टैक्स भी हम ऊंचे-ऊंचे दें और घाटे को भी हम ही भरें।

भक्त : टैक्स कम करने को जीएसटी लाई तो है यह सरकार, अब देखना...

बाबा : वैसे तो जीएसटी भी पिछली सरकार की ही सोच थी लेकिन चल..., अब यह आ ही गया है तो पेट्रोल अब सस्ता हो जाएगा न...?

भक्त : क्या बाबा, सस्ता - सस्ता लगा रखा है...? अरे..., देश का कब सोचोगे...?

बाबा : वही तो सोच रहा हूं क़ि अचानक इतने सारे देशभक्त पैदा हुए हैं कि अब तो सवाल करना भी हराम कर दिया है। खैर...! मेरी पूजा का टाइम हो गया है... मैं चलता हूं...

Last modified onThursday, 16 November 2017 14:43
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