Menu

 

आज के भारत के ‘वास्तुकार’ थे सरदार पटेल

आज के भारत के ‘वास्तुकार’ थे सरदार पटेल

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के पश्चात भारत की एकजुटता के लिए पुरजोर तरीके से पूरी मज़बूती के साथ काम किया। इससे एक नए राष्ट्र का उदय हुआ। देश की एकता की रक्षा करने के समक्ष कई चुनौतियां स्पष्ट रूप से विद्यमान थीं। सरदार पटेल ने लाजवाब कौशल के साथ इन चुनौतियों का सामना करते हुए देश को एकता के सूत्र में बांधने के कार्य को पूरा किया और एकीकृत भारत के शिल्पकार के रूप में पहचान हासिल की। ऐसे में 31 अक्टूबर के दिन उनकी बहुमूल्य विरासत का जश्न मनाने के लिए देश उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाता है।

सरदार भारत के राजनीतिक एकीकरण के पिता रूपी नायक का नाम था। उन्होंने भारतीय संघ में कई छोटे राज्यों के विलय की व्यवस्था की। उनके मार्गदर्शन और सशक्त निश्चय के अंतर्गत कई राज्य संयुक्त रूप से बड़ी संस्थाओं में तब्दील होने के बाद भारतीय संघ में शामिल हुए। क्षेत्रवाद ने राष्ट्रवाद का मार्ग प्रशस्त किया, क्योंकि उन्होंने लोगों से बड़ा सोचने और मज़बूत बनने का आह्वान किया। आज भारत का प्रत्येक हिस्सा आज़ादी के बाद के शुरुआती दिनों में सरदार पटेल द्वारा किए गए कार्य का महोत्सव मनाता है।

(Read in English: Sardar Patel: Architect Of The Unified India…)

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाने के लिए सरकार राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को संरक्षित और मज़बूत करने के प्रति सरकार के समर्पण को दर्शाने के क्रम में 31 अक्टूबर को देशभर में एक विशेष अवसर के तौर पर राष्ट्रीय एकता दिवस (नेशनल यूनिटी डे) के रूप में मनाती है। सरदार पटेल गणतंत्र भारत के संस्थापकों में से एक हैं, जिन्होंने अपने जीवनकाल में भारत के उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है।

गुजरात के आणंद के पास स्थित करमसाद गांव के एक साधारण भूस्वामी के यहां 31 अक्टूबर 1875 को जन्मे सरदार का नाम वल्लभभाई ज़वेरभाई पटेल रखा गया था। एक युवा वकील के रूप में अपनी कड़ी मेहनत के ज़रिए उन्होंने पर्याप्त पैसा बचाया ताकि वह इंग्लैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। आगामी समय में वह एक निडर वकील के तौर पर बड़े हुए, जिसे जनहित के मुद्दों पर कड़े एवं निडर अधिवक्ता के रूप में जाना जाता था। 

राजस्व दरों को लेकर 1928 में प्रधान कमांडर के रूप में बारदोली किसान आंदोलन के आयोजन के दौरान उन्होंने किसानों को कहा कि वे लंबे समय तक परेशानियां सहने के लिए तैयार रहें। अंततः सरदार के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने और परिवर्तित दरों को वापस कराने में सफल रहा। एक ग्राम सभा में एक किसान ने सरदार पटेल को संबोधित करते हुए कहा कि ‘आप हमारे सरदार हैं।’ बारदोली आंदोलन ने सरदार वल्लभभाई पटेल को राष्ट्रीय परिदृश्य पर पहचान दिलाई।

भारत की एकता के निर्माता को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए गुजरात के वडोदरा के नज़दीक साधु बेट नामक द्वीप पर 3.2 किमी की दूरी पर नर्मदा बांध की ओर सरदार पटेल का 182 मीटर ऊंचा (597 फीट) ‘स्टैच्यु ऑफ यूनिटी’ निर्माणाधीन है। सुप्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार द्वारा डिज़ाइन की गई इस प्रतिमा को करीब 20,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैलाने की योजना है और इसके आसपास करीब 12 किलोमीटर के क्षेत्र में एक कृत्रिम झील होगी। इस प्रतिमा के निर्माण कार्य का शुभारंभ 31 अक्टूबर 2014 को किया गया था। निर्माण कार्य शुरू होने से करीब एक वर्ष पूर्व इस परियोजना की औपचारिक रूप से घोषणा की गई थी। निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद, यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी।

(लेखक पत्रकार हैं। लेख में व्यक्त विचार उनके अपने हैं।)

back to top

loading...
Bookmaker with best odds http://wbetting.co.uk review site.