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जब रामकृष्ण परमहंस जार-जार रोए

जब रामकृष्ण परमहंस जार-जार रोए

जब रामकृष्ण परमहंस जार-जार रोएस्वामी रामकृष्ण परमहंस करुणा, दया और स्नेह की मूर्ति थे। इसके चलते उनका व्यवहार कभी-कभी बेहद विचित्र जान पड़ता है। एक बानगी देखिए।

एक बार एक अमीर सज्जन मित्र उनसे मिलने आए और बोले कि चलिए आपको नाव में घुमा लाएं।

नदी पार करके वे दोनों लोग वहां स्थित एक गरीब बस्ती में पहुंच गए। वहां गरीबों की दीन-दशा देखकर परमहंस ने रोना शुरू कर दिया। चूंकि, वह मां काली के भक्त थे तो मां का नाम लेकर जोर-जोर से रोए जा रहे थे। रोते-रोते यह भी कह रहे थे कि “देख मां, तेरे रहते, तेरे बेटे-बेटियां भूखे, नंगे और दुखी? तेरे संसार में इतना दुख क्यों?

रोते रहने के चलते उन्होंने वहां से उठने से ही इनकार कर दिया। उनके अमीर मित्र जान गए कि अब परमहंस कैसे उठेंगे। वह अकेले ही शहर लौटे और बाजार से गरीबों के लिए नए वस्त्र और खाने-पीने का ढेरों सामान लेकर वहीं लौटे। परमहंस अब भी लगातार काली मां का नाम लिए रोए जा रहे थे। जब उनके अमीर मित्र ने सभी गरीबों को अन्न ओर वस्त्र दान कर दिए तो परमहंस एकदम से चुप हो गए और निर्विकार भाव से दोनों हाथ ऊपर उठाकर बोले, ‘मां, बस एक तेरा ही सहारा,’ और मित्र के साथ वापस चल दिए।

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