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अपने अंदर के साहस को हमेशा संभालकर रखें

अपने अंदर के साहस को हमेशा संभालकर रखें

अपने अंदर के साहस को हमेशा संभालकर रखेंबाल गंगाधर तिलक से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं। आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी एक ऐसी घटना सुना रहे हैं, जिसके जरिए हम उनसे अपने साहस को संभालने का हुनर सीख सकते हैं।

एक बार तिलक के स्कूल के सभी छात्र इकट्ठे होकर मूंगफली खा रहे थे। मूंगफली खाने के साथ ही वे सभी छिलके भी वहीं फेंकते जा रहे थे। इससे वहां कक्षा कक्ष में काफी कूड़ा हो गया।

कुछ देर बाद जब उनके शिक्षक कक्षा में आए तो गंदगी देखकर बहुत नाराज हुए। उन्होंने अपनी छड़ी निकाली और बारी-बारी से सभी छात्रों के हाथों पर दो-दो बार मारने लगे। जब तिलक की बारी आई तो उन्होंने मार खाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि क्योंकि उन्होंने मूंगफली नहीं खाई है, और कूड़ा नहीं फैलाया है, इसलिए वह मार नहीं खाएंगे। यह सुनकर शिक्षक का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया, लेकिन तिलक टस से मस नहीं हुए। शिक्षक ने उनकी शिकायत प्राचार्य से कर दी। प्राचार्य ने उनके पिता को स्कूल में बुलवाया।

स्कूल आकर पिता ने बताया कि तिलक के पास पैसे ही नहीं थे, इसलिए वह मूंगफली खरीद ही नहीं सकता। और, इसीलिए उन्होंने वह कूड़ा नहीं फैलाया था जिसके लिए उन्होंने मार खाने से इनकार कर दिया।

यदि उस दिन उन्होंने उन शिक्षक से मार खा ली होती तो उनके अंदर का वह साहस उसी दिन मर गया होता जिसके चलते उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया।

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