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श्रमशीलता है सफल जीवन का अहम कदम

श्रमशीलता है सफल जीवन का अहम कदम

श्रमशीलता है सफल जीवन का अहम कदमएक बहुत धनी सेठ था। वह दिनभर ऐशोआराम में लगा रहता था। उसने जीवनभर कभी कोई पुण्य कार्य नहीं किया था।

फिर अंत समय, एक दिन, सेठ का पूर्वजन्म में कमाया हुआ पुण्य समाप्त हो गया। उस रात मां लक्ष्मी उसके सपने में आईं और कहा कि पुण्य फलों के होने से ही वह कहीं पर निवास करती हैं जब पुण्य फल खत्म हो जाते हैं तो वह उस स्थान को छोड़ देती हैं।

सेठ ने बहुत प्रार्थना की पर वह रुकी नहीं। बहुत गिड़गिड़ाने पर उन्होंने कहा कि वह रुक तो नहीं सकती लेकिन सेठ कोई एक वरदान मांग सकता है। सेठ ने वर मांगा कि उसका परिवार सहयोगपूर्वक रहे, श्रमशील, पराक्रमी और संयमी बना रहे। देवी लक्ष्मी ने प्रसन्नतापूर्वक वर दे दिया और चली गईं।

लक्ष्मी के जाने के बाद उसका परिवार गरीबी से घिर गया लेकिन ऐसी हालत में भी सभी परिजन प्रेमपूर्वक रहने लगे। अधिक परिश्रम करने लगे। कुछ समय बाद लक्ष्मी फिर लौट आई। सेठ जी ने लौटने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि मेहनत करना, आपस में प्यार और सहकार से रहना भी पुण्य में ही गिना जाता है। जहां यह होगा वहां उन्हें मजबूर होकर आना ही पड़ेगा।

सेठ का घर फिर से धन और धान्य से भरने लगा और सभी सुख की ओर बढ़ चले।

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