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बाबा - भक्त संवाद : पेट्रोल की मार, कौनसी सरकार है जिम्मेदार!

बाबा : भक्त, एक बात का जवाब दे क़ि जब पिछले दो साल से पेट्रोल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इतनी कम है, तब भी अपने देश में पेट्रोल इतना महंगा क्यों है?

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प्यार का खुमार और ‘श्रवण कुमार’

‘अरे…! यह प्यार-व्यार सब खुमार है, दो दिन में उतर जाएगा।‘ 'कुछ नहीं भावुक है, अभी ज़िन्दगी को करीब से नहीं देखा न, बस इसीलिए पागल हो रहा है।' 'चार किताबें पढ़ लेने से इन बच्चों का दिमाग खराब हो गया है।' 'एक बार शादी कर लो, उस लड़की को आसानी से भूल जाओगे।' 'अच्छा तुम्हें बाहर भेजा पढ़ने, यहां रहते तो कम से कम हमारी सुनते तो सही।' 'देख बेटा, हम उस लड़की को स्वीकार नहीं कर पा रहे, तू हमारी सुन ले, वरना हमारा बचना मुश्किल है।'

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देश को एक सूत्र में पिरो दिया था सरदार पटेल ने...

स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष को परिणति तक पहुंचने के ऐन पहले 500 से ज्यादा देसी रियासतों में बंटे भारत वर्ष को एकसूत्र में पिरोकर भारत संघ में शामिल करना एक असंभव काम था। इसके लिए रियासतों को राजी करना, फिर आजादी के साथ ही मिले विभाजन के बेहद खुरदरे जख्म पर मखमली मरहम लगाना, ये सारे काम सबल राष्ट्र की मजबूत नींव के लिए जरूरी था। इन शुरुआती दुरूह कामों को पूरा करने की पूरी जिम्मेदारी सरदार वल्लभ भाई झवेरी भाई पटेल ने अपने कंधे पर ली। उनकी अथक मेहनत का नतीजा है कि आज भारतीय गणतंत्र की दुनियाभर में तूती बोल रही है।

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आज के भारत के ‘वास्तुकार’ थे सरदार पटेल

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के पश्चात भारत की एकजुटता के लिए पुरजोर तरीके से पूरी मज़बूती के साथ काम किया। इससे एक नए राष्ट्र का उदय हुआ। देश की एकता की रक्षा करने के समक्ष कई चुनौतियां स्पष्ट रूप से विद्यमान थीं। सरदार पटेल ने लाजवाब कौशल के साथ इन चुनौतियों का सामना करते हुए देश को एकता के सूत्र में बांधने के कार्य को पूरा किया और एकीकृत भारत के शिल्पकार के रूप में पहचान हासिल की। ऐसे में 31 अक्टूबर के दिन उनकी बहुमूल्य विरासत का जश्न मनाने के लिए देश उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाता है।

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