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आधुनिक जीवन शैली में अनिवार्य है योग

आधुनिक जीवन शैली में योग का महत्‍व अर्थप्रधान एवं अतिव्‍यस्‍त आधुनिक जीवन शैली अपनाने के कारण आज का मानव न चाहते हुए भी दबाव एवं तनाव, अविश्राम, अराजकता, रोग ग्रस्‍त, अनिद्रा, निराशा, विफलता, काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्‍या तथा अनेकानेक कष्‍टपूर्ण परिस्थितियों में जीवन निर्वाह करने के लिए बाध्‍य हो गया है। जल, वायु, ध्‍वनि तथा अन्‍न प्रदूषण के साथ-साथ ऋणात्‍मक दुर्भावनाओं का भी वह शिकार बन चुका है। परिणामस्‍वरूप अनेकानेक शारीरिक रोगों के साथ-साथ मानसिक असंतुलन, चिंताएं, उदासी, सूनापन एवं दुर्भावनात्‍मक विचार उसे चारों ओर से घेर लेते हैं। उसके मन की शान्ति भंग हो जाती है लेकिन इन परिस्थितियों का दृढ़ता के साथ सामना करने के लिए हमारी भारतीय पौराणिक योग पद्धति सहायता कर सकती है।

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शांति और आनंद के लिए है ‘राजयोग’

शांति और आनंद के लिए है ‘राजयोग’आपाधापी भरे इस युग में जन-सामान्‍य बहुत कुछ हासिल करने की चाह में मानसिक अशांति और शारीरिक व्‍याधियों को आमंत्रण दे रहा है। लेकिन, विकास की प्रक्रिया में साझीदार होना वक्‍त की आवश्‍यकता है पर अंधाधुंध दौड़ना शरीर और मन को देने वाली यंत्रणा है। 21 जून को विश्‍व अन्‍तर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जन-मानस में योग के प्रति जो सकारात्‍मक भावनाएं उत्‍पन्‍न हो रही हैं वे वास्‍तव में एक सुखद अनुभव है। भारत भूमि में वर्षों से योग प्रचालित रहा है और आज विश्‍व भी इसे मान्‍यता प्रदान कर रहा है। राजयोग एक ऐसी मानसिक अवस्‍था है जिसे शांत चित्‍त से कोई भी कर सकता है।

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चंपारण सत्‍याग्रह के सौ साल...

भारत में महात्‍मा गांधी के प्रथम सत्‍याग्रह की शताब्‍दी को इस माह अप्रैल में मनाया जा रहा है। इसका शुभांरभ उत्‍तरी बिहार के पूर्व में अविभाजित चंपारण जिले से किया गया था। गांधीजी ब्रिटिश स्‍टेट मालिकों के द्वारा जिले के किसानों के खिलाफ बढ़ते हुए दुर्व्‍यवहार की जानकारी मिलने पर अप्रैल 1917 को वहां गए थे। चंपारण के किसानों ने गांधीजी को जानकारी दी कि वे अपनी भूमि के प्रत्‍येक 20 हिस्‍सों में से तीन पर अपने भूमि मालिकों के लिए खेती करने के कानून से बंधे हैं। इस व्‍यवस्‍था को तिनकथिया कहा जाता था।

भारत में महात्‍मा गांधी के प्रथम सत्‍याग्रह की शताब्‍दी को इस माह अप्रैल में मनाया जा रहा है। इसका शुभांरभ उत्‍तरी बिहार के पूर्व में अविभाजित चंपारण जिले से किया गया था। गांधीजी ब्रिटिश स्‍टेट मालिकों के द्वारा जिले के किसानों के खिलाफ बढ़ते हुए दुर्व्‍यवहार की जानकारी मिलने पर अप्रैल 1917 को वहां गए थे। चंपारण के किसानों ने गांधीजी को जानकारी दी कि वे अपनी भूमि के प्रत्‍येक 20 हिस्‍सों में से तीन पर अपने भूमि मालिकों के लिए खेती करने के कानून से बंधे हैं। इस व्‍यवस्‍था को तिनकथिया कहा जाता था। (Read in English)

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मात्र एक ‘दलित उद्धारक’ ही नहीं थे बाबा साहेब...

बाबा साहेब अम्‍बेडकर के जीवन और कार्यों के बारे में व्‍यापक अनुसंधान, अध्‍ययन और लेखन हो चुका है। आज हम बाबा साहेब को स्‍वतंत्रता आंदोलन के महानतम नेताओं में से एक के रूप में देखते हैं, जो न केवल एक क्रांतिकारी राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में महान थे, बल्कि शैक्षिक दृष्टि से एक महान बुद्धिजीवी थे।

बाबा साहेब अम्‍बेडकर के जीवन और कार्यों के बारे में व्‍यापक अनुसंधान, अध्‍ययन और लेखन हो चुका है। आज हम बाबा साहेब को स्‍वतंत्रता आंदोलन के महानतम नेताओं में से एक के रूप में देखते हैं, जो न केवल एक क्रांतिकारी राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में महान थे, बल्कि शैक्षिक दृष्टि से एक महान बुद्धिजीवी थे। बाबा साहेब नेताओं की उस श्रेणी से संबद्ध थे, जिन्‍होंने ऐसे विशिष्‍ट कार्य किए, जिनके बारे में बहुत कुछ लिखा जा सकता है, बल्कि उन्‍होंने स्‍वयं भी उपयोगी विषयों पर व्‍यापक लेखन किया, जो भावी पीढ़ियों के लिए पढ़ने  योग्‍य है।

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