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जब निराला का सामना हुआ भिखारिन से

जब निराला का सामना हुआ भिखारिन से

जब निराला का सामना हुआ भिखारिन सेमहाकवि निराला का जीवन निष्कपट था। जैसा वह कहते थे, वही उनका आचरण था, बाहर-भीतर एक समान। उनके जीवन के ऐसे अनेक प्रसंग हैं जब उन्होंने दीन-दुखियों के आगे अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

एक बार वह अपने एक प्रकाशक से पैसा लेकर लौट रहे थे। उन्हें तकरीबन तीन सौ रुपये मिले थे। उन्होंने रुपये जेब में रखे और घर की ओर चल पड़े।

रास्ते में एक भिखारिन सामने पड़ गई और भीख मांगने लगी। निराला ठिठककर खड़े हो गए और उन्होंने उससे पूछा कि बताओ तुम्हें कितने पैसे मिल जाएं तो तुम भीख मांगना छोड़ दोगी?

भिखारिन के मुंह से कोई जवाब न निकलते देख निराला गंभीर हो उठे और बोले तुमने मुझे बेटा कहा है और निराला की मां भीख नहीं मांग सकती। इतना कहकर, उन्होंने अपनी जेब से पूरे के पूरे रुपये निकालकर उसे दे दिए और आगे बढ़ गए। भिखारिन उन्हें बस आश्चर्य से देखती ही रह गई।

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