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चुनौतियों से भरे 70 साल; क्या खोया, क्या पाया…!

ब्रिटिश हुकूमत का मतलब क्या था यह उस समय के आंदोलन के इतिहास के एक अंश से समझा जा सकता है। महात्मा गांधी ने ‘यंग इंडिया’ में लिखा“ हमें अनुभव होता हो या न होता हो, कुछ दिन से हम पर एक प्रकार का फौजी शासन हो रहा है। फौजों का शासन आखिर है क्या? यही कि सैनिक अफसर की मर्जी ही कानून बन जाती है और वह चाहे साधारण कानून को ताक पर रखकर विशेष आज्ञाएं लाद देता है और जनता बेचारी में उनके विरोध करने का दम नहीं होता, पर मैं आशा करता हूं, वे दिन जाते रहे कि अंग्रेज शासकों के फरमानों के आगे हम चुपचाप सिर झुका दें...”

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स्वतंत्र भारत के 70 सालों में सतत सामाजिक न्याय की परंपरा...

हमारे देश की 16 फीसदी से ज्यादा आबादी अनुसूचित जातियों के लोगों की है। एक लंबे समय तक सामाजिक बहिष्कार होने के कारण समाज का एक वर्ग व्यक्तिगत वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक अवसरों से वंचित रहा है। बाबासाहेब अंबेडकर ने इस वर्ग को 'वंचित वर्ग' कहा। इसी पृष्ठभूमि से आने वाले बाबासाहेब इस वर्ग की जरूरतों और चुनौतियों से परिचित थे। अपने सार्वजनिक जीवन में बाबासाहेब ने कई उपलब्धियों की ऊंचाइयों को छुआ। विश्व के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर वह समुदाय के हित में कार्य करने के लिए स्वदेश लौटे।

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किसानों की 'समस्या' से नहीं..., बस 'राजनीति' से सरोकार...!

किसानों की समस्या से सरोकार नहीं..., बस राजनीति...!वित्त मंत्री ने साफ कर दिया है कि उनके पास किसानों के कर्ज माफ करने लायक पैसे नहीं हैं। राज्य सरकारें अपना हिसाब लगाएं और चाहें तो कर्ज माफ कर दें और न चाहें तो माफ न करें।

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स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत के बढ़ते कदम...

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत के बढ़ते कदम...पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की तरक्की ने देश को दुनिया के ऊर्जा नक्शे पर विशेष पहचान दिलाई है। हाल ही में भारत की ऊर्जा क्षमता में परमाणु ऊर्जा के रूप में सात गीगा वॉट (7000 मेगा वॉट) ऊर्जा क्षमता को शामिल किए जाने का निर्णय भारत की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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