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पत्रकारिता और राजनीति में ‘एच’ का सिद्धांत

धर्मेंद्र कुमारआज के दौर में, और शायद पहले भी, पत्रकारिता और राजनीति एक दूसरे के साथ समानांतर चलते प्रतीत होते हैं। हालांकि, पत्रकारिता का क्षेत्र राजनीति से कहीं ज्यादा बड़ा है। पत्रकारिता की भाषा में कहें तो राजनीति महज एक ‘बीट’ है लेकिन हमारे देश में चूंकि राजनीति ही सबसे बड़ा ‘रुचि’ का विषय है तो पत्रकारिता में राजनीति ही छायी रहती है।

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किसानों की 'समस्या' से नहीं..., बस 'राजनीति' से सरोकार...!

किसानों की समस्या से सरोकार नहीं..., बस राजनीति...!वित्त मंत्री ने साफ कर दिया है कि उनके पास किसानों के कर्ज माफ करने लायक पैसे नहीं हैं। राज्य सरकारें अपना हिसाब लगाएं और चाहें तो कर्ज माफ कर दें और न चाहें तो माफ न करें।

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