संपादकीय समाचार

संपादकीय (111)

लाल बत्ती पर रोक से वीआईपी संस्कृति को शुरुआती झटका

यूनान के एक प्रसिद्ध दार्शनिक ने कहा था कि ‘अच्छी शुरुआत आधी सफलता होती है’। सरकारी गाड़ियों पर लाल बत्ती लगाने की संस्कृति को खत्म करने के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया निर्णय इस दिशा में लड़े जा रहे युद्ध के खिलाफ एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकता है। (Read in English)

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धर्मेंद्र कुमार

यह एक विशुद्ध राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया ही थी जिसकी एक बार फिर से शुरुआत पीवी नरसिंह राव और तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर जनता के जेहन में हुई थी। लोगों ने बीजेपी को अस्पष्ट बहुमत देकर चुना...। पहले 13 दिन और उसके बाद पूरे पांच साल के लिए मिली जुली सरकार...। 

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समानता की ओर अग्रसर आधी आबादी...  

मंगलयान मिशन और एक साथ लॉन्च किए गए 104 उपग्रहों को लेकर भारतीय महिला वैज्ञानिकों के योगदान की प्रशंसा न केवल भारत द्वारा की जा रही है बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय महिला वैज्ञानिकों की सराहना हो रही है। डॉ. केसी थॉमस, एन वलारमती, मिनाल संपथ, अनुराधा टीके, रितू करिधल, मोमिता दत्ता और नंदनी हरिनाथ जैसे वैज्ञानिकों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।

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बुधवार को सातवां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। भारत के निर्वाचन आयोग की स्थापना की याद में 2011 में इसकी शुरुआत की गई थी।

बुधवार को सातवां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। भारत के निर्वाचन आयोग की स्थापना की याद में 2011 में इसकी शुरुआत की गई थी। 25 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर निर्वाचन आयोग अस्तित्व में आया था लेकिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर इतिहास को याद करने के बजाय हमें आगे की राह के बारे में तय करना होगा। राष्ट्रीय मतदाता दिवस की घोषणा मतदाताओं की संख्या मूलत: जो हाल में ही 18 वर्ष की आयु सीमा पूरी की है, को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। (Read in English)

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देश राष्‍ट्रीय बालिका दिवस मना रहा है। प्रत्‍येक वर्ष 24 जनवरी को हम बालिका दिवस मनाते हैं, समाज में बालिकाओं के लिए समान स्थिति और स्‍थान स्‍वीकार करते है और एकसाथ मिलकर हमारे समाज में बालिकाओं के साथ हो रहे भेदभाव और असमानता के विरुद्ध संघर्ष का संकल्‍प लेते हैं।

देश राष्‍ट्रीय बालिका दिवस मना रहा है। प्रत्‍येक वर्ष 24 जनवरी को हम बालिका दिवस मनाते हैं, समाज में बालिकाओं के लिए समान स्थिति और स्‍थान स्‍वीकार करते है और एकसाथ मिलकर हमारे समाज में बालिकाओं के साथ हो रहे भेदभाव और असमानता के विरुद्ध संघर्ष का संकल्‍प लेते हैं।

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