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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार घोषित, विनोद खन्ना को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

दादा साहेब फाल्के पुरस्कारनई दिल्ली : विभिन्न श्रेणियों में वर्ष 2017 के लिए 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। जाने-माने फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना को हिन्दी सिनेमा में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया जा रहा है।

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विवादों के बावजूद राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की गरिमा बरकरार

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार इस देश का सबसे सम्मानित राष्ट्रीय पुरस्कार है जिसे पाने की तमन्ना भारतीय सिनेमा के बड़े फिल्म सितारों से लेकर एक संघर्षरत फिल्मकार, अभिनेता या तकनीशियन तक करता है। खास बात यह है कि जहां निजी क्षेत्र के दूसरे अन्य कई फिल्म पुरस्कारों ने अपनी गरिमा और विश्वसनीयता पूरी तरह से खो दी है, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने अपनी गरिमा और विश्वसनीयता बरक़रार रखी है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार इस देश का सबसे सम्मानित राष्ट्रीय पुरस्कार है जिसे पाने की तमन्ना भारतीय सिनेमा के बड़े फिल्म सितारों से लेकर एक संघर्षरत फिल्मकार, अभिनेता या तकनीशियन तक करता है। खास बात यह है कि जहां निजी क्षेत्र के दूसरे अन्य कई फिल्म पुरस्कारों ने अपनी गरिमा और विश्वसनीयता पूरी तरह से खो दी है, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने अपनी गरिमा और विश्वसनीयता बरक़रार रखी है। 

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जारी है राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की गौरवशाली परंपरा...

देश में यूं तो बरसों से कई फिल्म पुरस्कार समारोह होते रहे हैं, उनमें कुछ में बड़े-बड़े सितारों की मौजूदगी और उनके द्वारा प्रस्तुत देर रात तक चलने वाले रंगारंग कार्यक्रम ऐसे समारोह को कुछ लोकप्रिय भी करते हैं, लेकिन, जो प्रतिष्ठा व महत्व राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का है वह अद्धभुत है। सच कहा जाए तो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार हैं और बरसों से चली आ रही इस परंपरा का आज भी कोई सानी नहीं है।

देश में यूं तो बरसों से कई फिल्म पुरस्कार समारोह होते रहे हैं, उनमें कुछ में बड़े-बड़े सितारों की मौजूदगी और उनके द्वारा प्रस्तुत देर रात तक चलने वाले रंगारंग कार्यक्रम ऐसे समारोह को कुछ लोकप्रिय भी करते हैं, लेकिन, जो प्रतिष्ठा व महत्व राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का है वह अद्धभुत है। सच कहा जाए तो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार हैं और बरसों से चली आ रही इस परंपरा का आज भी कोई सानी नहीं है।

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