Menu

 


कई मायनों में यादगार रहा 47वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह

रंग-बिरंगी जगमगाती रोशनी और नई आशाओं व सफलताओं के संग भारत का 47वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 28 नवम्बर को समाप्त हो गया।

रंग-बिरंगी जगमगाती रोशनी और नई आशाओं व सफलताओं के संग भारत का 47वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 28 नवम्बर को समाप्त हो गया। देश में यूं तो वर्षभर कई प्रकार के फिल्म उत्सवों का आयोजन होता रहता है लेकिन देश के इस सबसे बड़े मेले की बात ही कुछ और है। गत 20 नवम्बर को शुरू हुए इस नौ दिवसीय फिल्म समारोह में जहां देश विदेश की कई अविस्मरणीय फिल्मों का प्रदर्शन हुआ वहीं बहुत सी फिल्म हस्तियों ने इस समारोह में पहुंचकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस फिल्मोत्सव की सबसे बड़ी बात यह भी रही कि इस बार से ऐसी कुछ नई शुरुआत हुई हैं जिससे यह समारोह तो अधिक आकर्षित बना ही साथ ही फिल्मकारों के लिए भी नए मौकों और संभावनाओं के मार्ग प्रशस्त होने लगे हैं।

सूचना प्रसारण मंत्रालय, फिल्म समारोह निदेशालय और गोवा सरकार द्वारा गोवा में आयोजित 47वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में 88 देशों की कुल 275 फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। समारोह में दिखाई गई फिल्मों में तीन प्रतियोगिता वर्ग थे जिसके मुख्य प्रतियोगिता वर्ग में कुल 15 फ़िल्में थीं। इस वर्ग में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए स्वर्ण मयूर और 40 लाख रुपये राशि का सबसे बड़ा पुरस्कार ईरान की फिल्म ’डॉटर’ को मिला। दक्षिण ईरान की पृष्ठभूमि में बनी यह ड्रामा फिल्म एक सख्त पिता और उसकी युवा बेटी के टकराव की कहानी है। यहां यह भी दिलचस्प है कि सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार रजत मयूर और 10 लाख रुपये का पुरस्कार भी इसी फिल्म में पिता की भूमिका निभाने वाले अभिनेता फरहाद असलानी को मिला है। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार ग्रहण करने के लिए अभिनेता फरहाद असलानी और सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार ग्रहण करने के लिए फिल्म के निर्देशक रज़ा मीरकरिमी स्वयं समारोह में मौजूद थे जबकि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का रजत मयूर और 10 लाख रुपये राशि का पुरस्कार लातविया की फिल्म ‘मैलो मड’ के लिए अभिनेत्री एलीना वासका को मिला। एलीना की अनुपस्थिति में उनका यह पुरस्कार फिल्म के निर्देशक रेनर्स विम्बा ने प्राप्त किया।

उधर, सर्वोतम निर्देशक का पुरस्कार तुर्की फिल्म ‘रौफ’ के लिए बारिस काया और सोनर कनेर को मिला। इस पुरस्कार में रजत मयूर के साथ 15 लाख रुपये की राशि दोनों को संयुक्त रूप से प्रदान की गई जबकि नए युवा निर्देशक की पहली फिल्म के लिए इस वर्ष आरम्भ हुआ शताब्दी पुरस्कार अर्जेंटीना की फिल्म ‘रारा’ के लिए निर्देशिका मारिया जोस मार्टिन को मिला। इसके लिए मार्टिन ने पुरस्कारस्वरुप 10 लाख रुपये और रजत मयूर ग्रहण किया। समारोह का एक अन्य प्रमुख पुरस्कार निर्णायक मंडल का विशेष पुरस्कार है। यह इस बार कोरियाई फिल्म ‘द थ्रोन’ के निर्देशक ली जूं इक के खाते में गया। ली के स्वयं समारोह में न होने के कारण उनका यह पुरस्कार रजत मयूर और 15 लाख रुपये इसी फिल्म के अभिनेता सुंग हांग हो ने स्वीकार किया। इसके अतिरिक्त इस बार एक पुरस्कार इंटरनेशनल काउंसिल फॉर फिल्म एंड टेलीविजन, पेरिस यानी आईसीएफटी और यूनेस्को द्वारा स्थापित गांधी पदक पुरस्कार भी दिया गया। यह पुरस्कार गांधी जी के शांति और अहिंसा जैसे आदर्शों को दर्शाने वाली निर्देशक मुस्तफा कारा की तुर्की फिल्म ‘कोल्ड ऑफ़ कलंदर’ को मिला। गांधी पदक का यह पुरस्कार तुर्की सरकार के प्रतिनिधि ने ग्रहण किया। निर्णायक मंडल ने इस वर्ग में शामिल कुल सात फिल्मों में से एक अन्य फिल्म कोरिया की ‘द एपोलॉजी’ को भी विशेष उल्लेख सम्मान दिया गया।

इस 47वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में देश-विदेश की कई फिल्म हस्तियों ने हिस्सा लिया। भारत से समारोह में जहां पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में ‘शोले’ तथा ‘सीता और गीता’ जैसी कालजयी फिल्मों के निर्देशक रमेश सिप्पी तथा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत उपस्थित हुए तो समापन समारोह का बड़ा आकर्षण ‘बाहुबली’ जैसी फिल्म से सफलता के नए आयाम रचने वाले फिल्मकार एस एस राजामौली रहे। यूं सुभाष घई, एन चंद्रा, नाना पाटेकर, शत्रुघन सिन्हा, ओम पुरी, मनोज जोशी, सोहा अली खान, अली जाफर, सचिन जिगर और रायमा सेन आदि ने भी समारोह में हिस्सा लिया। साथ ही समारोह के उद्घाटन पर जहां केन्द्रीय सूचना मंत्री एम वेंकैया नायडू और केन्द्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर तथा समापन पर केन्द्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने गोवा पहुँच समारोह में हिस्सा ले विभिन्न गतिविधियों का जायजा भी लिया। वहां गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा और गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर ने भी फिल्मोत्सव में अपनी उपस्थति और दिलचस्पी लगातार बनाए रखी।

फिल्म समारोह में दर्शक तब भी मंत्रमुग्ध हो गए जब सुप्रसिद्द पार्श्व गायक एसपी बालासुब्रमण्यम को वर्ष की भारतीय फिल्म हस्ती के शताब्दी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब तक छह बार राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके एसपी का 40 हज़ार गीतों की रिकॉर्डिंग के रिकॉर्ड के रूप में उनका नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। एसपी को शताब्दी पुरस्कार के रूप में 10 लाख रुपये की राशि भी प्रदान की गई। गोवा का 2016 का यह अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह तब भी गरिमामय हो गया जब दक्षिण कोरिया के विख्यात फिल्मकार इम क्वोन तेइक को जीवनपर्यंत उपलब्धियों के सम्मान और 10 लाख रुपये की राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस बार के फिल्म समारोह में कोई भारतीय फिल्म पुरस्कार तो नहीं पा सकी लेकिन देश-विदेश के दर्शकों ने कुछ भारतीय फिल्मों इश्ति, सहज पाथेर गप्पो, पिंकी ब्यूटी पार्लर, के सेरा सेरा, हरिकथा प्रसंगा, मंत्रा, सैराट, अल्लामा, बाहुबली, बाजीराव मस्तानी, सुल्तान और एयरलिफ्ट आदि को काफी सराहा।

47वां फिल्म महोत्सव अपनी दो नई और बड़ी बातों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। पहला इसलिए कि इस बार भारत सरकार ने भारतीय फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए ‘फिल्म प्रोत्साहन कोष’ की स्थापना करके एक नई और अहम शुरुआत की है। इस कोष से उन भारतीय फिल्मकारों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी जिनकी फिल्म विश्व के किसी भी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के प्रतियोगिता खंड के लिए चुनी गई हो या फिर उनकी फिल्म अकादमी पुरस्कार के लिए भारत की ओर से विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में अधिकारिक रूप से नामांकित हुई हो। इस वित्तीय सहायता राशि से फिल्मकार अपनी फिल्म को विदेशों में अच्छे से प्रचारित कर सकेंगे। इसके अलावा इस समारोह कि एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि हमारा यह फिल्म समारोह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी रूप से भी अधिक समृद्ध हो गया है। असल में इस बार फिल्मों के प्रदर्शन के लिए बार्को लेजर प्रोजेक्शन तकनीक का पहली बार ऐतिहासिक प्रयोग किया गया। फिल्मों के गुणवत्ता को बढ़ाकर फिल्मों को अत्यंत स्पष्ट छवि प्रदान करने वाली इस तकनीक को प्रयोग करने वाला यह पहला अंतरराष्ट्रीय समारोह बन गया है।

फिल्म समारोह के दौरान राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार की मल्टी मीडिया प्रदर्शनी ‘आज़ादी के 70 वर्ष –याद करो क़ुरबानी’ की भी सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। साथ ही सूचना प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का समापन समारोह का संबोधन भी काफी प्रभावशाली रहा जिसमें कर्नल राठौड़ ने जहां अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा, गुलज़ार, एआर रहमान, अनिल कपूर और राजू हिरानी जैसी उन फिल्म हस्तियों को सराहा जिन्होंने हाल के वर्षों में अपनी कला के माध्यम से भारतीय सिनेमा को विदेशों में लोकप्रियता दिलाई है। वहां फिल्मों द्वारा समाज को बदलने की शक्ति, अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के अनूठे महत्व पर भी उन्होंने अपने खूबसूरत उद्दगार व्यक्त किए। साथ ही विदेशी फिल्मकारों को भारत में शूटिंग के लिए आमंत्रित करते हुए राज्यमंत्री राज्यवर्धन ने शूटिंग के लिए सभी अनुमतियों और जानकारियों के लिए अपनी एकल खिड़की सुविधा के बारे में भी बताया और राजस्थान, अंडमान, गोवा और लद्दाख की खूबसूरत लोकेशन के बारे में भी।

कुल मिलाकर 47वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह एक सफल और यादगार आयोजन रहा।

(लेखक पत्रकार हैं)

back to top

loading...
Bookmaker with best odds http://wbetting.co.uk review site.