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ग्रामीण विकास क्षेत्र के बजट प्रावधान, कितने होंगे कामयाब…!

साल 2012-13 के 50,162 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान से साल 2017-18 में ग्रामीण विकास विभाग का आबंटन 109042.45 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसके अलावा 2017-18 के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के कार्यक्रमों के लिए पीएमजीएसवाई तथा पीएमएवाई में उच्चतर वित्त आयोग अनुदान तथा राज्य के अधिक भागीदारी भी उपलब्ध थी। कुल मिलाकर यह सब 2012-13 में उपलब्ध कुल निधि से लगभग तीन गुना है। बढ़े हुए वित्तीय प्रावधान के अतिरिक्त, ग्रामीण विकास ने सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना-2011 (एसईसीसी-2011), आईटी / डीबीटी भुगतान प्रणाली, लेन-देन आधारित कार्यक्रम एमआईएस तथा सम्पदाओं के जियो-टेगिंग के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दूरगामी प्रशासनिक व्यवस्था शुरू की है।बीते दिन पेश हुए बजट में सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र विकास के लिए अपनी थैली खोली है। यह कहा जा सकता है कि संभवत: पहली बार किसी बजट में गांवों को केंद्र में रखा गया है। यहां तक कि इसके लिए इस बार मध्यम वर्ग को भी एक तरह से दरकिनार कर दिया गया है। अब तक यह माना जाता था कि मध्यम वर्ग को खुश रखकर ही वोट हासिल किए जा सकते हैं। इसे ध्यान में रखें तो अगले वर्ष चुनावों का सामना करने जा रही मोदी सरकार का यह बड़ा और नई तरह का दांव माना जा सकता है। लेकिन, सवाल यह है कि ग्राम्य विकास के इन प्रावधानों को सरकार कितना पूरा कर पाएगी...?

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आम बजट 2018-19 : किसानों की बढ़ी आशा, मध्यम वर्ग को हाथ लगी निराशा

बजट 2018-19 की मुख्य बातेंनई दिल्ली : केंद्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि सरकार विनिर्माण सेवाओं और निर्यातों के क्षेत्र में आठ प्रतिशत से अधिक की आर्थिक विकास दर प्राप्‍त करने के प्रति वचनबद्ध है।

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बजट 2018-19: कुल खर्च 24.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान

बजटनई दिल्ली : साल  2018-19 के दौरान कुल व्यय 24.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक तथा राजकोषीय घाटा 6 लाख 24 हजार 276 करोड़ रुपये होने का अनुमान है जिसका वित्त पोषण ऋण लेकर किया जाएगा।

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बजट की दास्‍तान: 70 साल का शानदार सफर...

कल्‍पना कीजिए बजट पेश किया जा चुका है, अगली सुबह आप क्‍या करेंगे। जाहिर तौर पर आप अगले साल के बजट की प्रमुखबातों पर एक सरसरी नज़र दौड़ाएंगे।

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अरुण जेटली ने 21.47 लाख करोड़ रुपये खर्चे का बजट किया पेश

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि हमारा एजेंडा जनता के जीवन की गुणवत्ता में आमूल परिवर्तन लाने के लिए प्रशासन की गुणवत्ता में परिवर्तन हेतु टीईसी इंडिया अर्थात ट्रांसफॉर्म, एनर्जाइज़ एवं क्लीन इंडिया पर केन्द्रित रहेगा।

नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बजट 2017-18 पेश किया। यह पहला मौका है जब आम बजट में ही रेल बजट भी शामिल है। इस बार बजट को योजनागत एवं गैर-योजनागत श्रेणियां में वर्गीकृत भी नहीं किया गया है। ख़ास बात यह भी है कि इस बार बजट को अपने निर्धारित समय से करीब एक माह पूर्व फरवरी माह की शुरुआत में ही पेश किया गया है। बजट 2017-18 के लिए कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। इस व्यय से कई गुना सकारात्मक प्रभाव और उच्च वृद्धि की उम्मीद है। (Read in English)

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बजट के 1 फरवरी को पेश होने से सुनिश्चित हो सकती है व्यय की गुणवत्ता

केन्द्र सरकार ने वर्ष 2016-17 के बजट में व्यय के मद में 20 लाख करोड़ रुपये के करीब खर्च करने का प्रावधान किया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कुल व्यय 22 लाख करोड़ रुपये और 23 लाख करोड़ रुपये के बीच रखा है। यह मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 14 प्रतिशत है।

केन्द्र सरकार ने वर्ष 2016-17 के बजट में व्यय के मद में 20 लाख करोड़ रुपये के करीब खर्च करने का प्रावधान किया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कुल व्यय 22 लाख करोड़ रुपये और 23 लाख करोड़ रुपये के बीच रखा है। यह मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 14 प्रतिशत है। (Read in English)

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