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आम बजट 2018-19 : किसानों की बढ़ी आशा, मध्यम वर्ग को हाथ लगी निराशा

बजट 2018-19 की मुख्य बातेंनई दिल्ली : केंद्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि सरकार विनिर्माण सेवाओं और निर्यातों के क्षेत्र में आठ प्रतिशत से अधिक की आर्थिक विकास दर प्राप्‍त करने के प्रति वचनबद्ध है।

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बजट 2018-19: कुल खर्च 24.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान

बजटनई दिल्ली : साल  2018-19 के दौरान कुल व्यय 24.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक तथा राजकोषीय घाटा 6 लाख 24 हजार 276 करोड़ रुपये होने का अनुमान है जिसका वित्त पोषण ऋण लेकर किया जाएगा।

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अरुण जेटली ने 21.47 लाख करोड़ रुपये खर्चे का बजट किया पेश

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि हमारा एजेंडा जनता के जीवन की गुणवत्ता में आमूल परिवर्तन लाने के लिए प्रशासन की गुणवत्ता में परिवर्तन हेतु टीईसी इंडिया अर्थात ट्रांसफॉर्म, एनर्जाइज़ एवं क्लीन इंडिया पर केन्द्रित रहेगा।

नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बजट 2017-18 पेश किया। यह पहला मौका है जब आम बजट में ही रेल बजट भी शामिल है। इस बार बजट को योजनागत एवं गैर-योजनागत श्रेणियां में वर्गीकृत भी नहीं किया गया है। ख़ास बात यह भी है कि इस बार बजट को अपने निर्धारित समय से करीब एक माह पूर्व फरवरी माह की शुरुआत में ही पेश किया गया है। बजट 2017-18 के लिए कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। इस व्यय से कई गुना सकारात्मक प्रभाव और उच्च वृद्धि की उम्मीद है। (Read in English)

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आर्थिक समीक्षा 2016-17: जीएसटी से साझा भारतीय बाजार निर्माण की उम्मीद

संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में कहा गया है कि सुदृढ़ वृहत आर्थिक स्थिरता की पृष्‍ठभूमि में वर्ष के दौरान दो प्रमुख घरेलू नीतिगत घटनाएं हुई हैं। इनमें से एक है... संविधान संशोधन पारित होने से ऐतिहासिक वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने का मार्ग प्रशस्‍त होना और दूसरी है दो बड़े नोटों का विमुद्रीकरण।

नई दिल्ली : संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में कहा गया है कि सुदृढ़ वृहत आर्थिक स्थिरता की पृष्‍ठभूमि में वर्ष के दौरान दो प्रमुख घरेलू नीतिगत घटनाएं हुई हैं। इनमें से एक है... संविधान संशोधन पारित होने से ऐतिहासिक वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने का मार्ग प्रशस्‍त होना और दूसरी है दो बड़े नोटों का विमुद्रीकरण। समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि जीएसटी से एक साझा भारतीय बाज़ार का निर्माण होगा और कर अनुपालन एवं प्रशासन तथा निवेश और आर्थिक वृद्धि में सुधार होगा तथा यह भारत के सहकारी संघवाद के प्रबंधन में एक नया ठोस प्रयोग है।

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