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बजट 2017-18 की मुख्य बातें

http://www.mediabharti.com/news1/index.php/2011-06-30-23-44-03/item/3026-general-budget-2017-18-highlights

नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बजट 2017-18 पेश किया। बजट की मुख्य बातें इस तरह हैं... (Read in English)

* वर्ष 2017-18 के बजट में कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है और इससे व्यापक प्रभाव पड़ने एवं विकास की रफ्तार तेज होने की आशा है।

* राज्यों और विधानसभा वाले केन्द्र शासित प्रदेशों को कुल मिलाकर 4.11 लाख करोड़ रुपये अंतरित किए जा रहे हैं जबकि वर्ष 2016-17 के बजट अनुमान में यह राशि 3.60 लाख करोड़ रुपये थी।

* पेंशन को छोड़ रक्षा व्यय 2,74,114 करोड़ रुपये का है।

* पहली बार आम बजट के साथ एक समेकित आउटकम बजट भी पेश किया गया है, जिसमें सभी मंत्रालयों एवं विभागों को कवर किया गया है।

* जेटली ने विशेष जोर देते हुए कहा कि अगले वर्ष के लिए राजस्वय घाटा 1.9 प्रतिशत तय किया गया है जबकि एफआरबीएम अधिनियम में यह दो प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक वृद्धि के इंजन के रूप में देखा जाता है और उम्मीद है कि वर्ष 2017 में भारत, दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा।

* विमुद्रीकरण को जनता के हित में किए गए कार्य की संज्ञा देते हुए वित्त मंत्री ने महात्मा गांधी की बात को दोहराते हुए कहा कि “सही दिशा में किया गया कार्य कभी भी असफल नहीं होता”।

* जेटली ने कहा कि हमारा एजेंडा प्रशासन की गुणवत्ता, समाज के विभिन्न तबकों में शक्ति का संचार कर उन्हें समर्थ बनाना और देश को भ्रष्टाचार, काला धन एवं अपारदर्शी राजनीतिक वित्तपोषण की बुराइयों को समाप्त करना है।

* वित्त मंत्री ने कहा कि हमारा ध्यान मौद्रिक पहलुओं को संयमित रखकर ग्रामीण क्षेत्र का विकास, बुनियादी अवसंरचना को बढ़ावा देने एवं गरीबी उन्मूलन के लिए अधिक से अधिक धन खर्च करने पर है।

* वर्ष 2019 अर्थात् महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक सरकार एक करोड़ परिवारों को ग़रीबी से निजात दिलाने, 50,000 ग्राम पंचायतों को गरीबी मुक्त बनाने के लिए अंत्योदय मिशन पर काम करेगी।

* ग्रामीण स्तर पर महिला शक्ति केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।

* महिला एवं बाल कल्याण के लिए बजट अनुमान 2016-17 के 1,56,528 करोड़ रुपये की धनराशि को बढ़ाकर बजट 2017-18 में 1,84,632 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया।

* बुनियादी विकास के लिए वर्ष 2017-18 में 3,96,135 करोड़ रुपये आवंटित।

* रेलवे व्यय 1,31,000 करोड़ रुपये प्रस्तावित, 55,000 करोड़ रुपये सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।

* 2017-18 में ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एक्सपोर्ट स्कीम योजना की शुरुआत की जाएगी।

* एफडीआई नीतियों में कई अन्य उदारवादी कदम विचाराधीन।

* विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) को वर्ष 2017-18 में समाप्त किया जाएगा।

* अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू निजी क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों के प्रदर्शन के समकक्ष पहुंचने के लिए एक एकीकृत सार्वजनिक क्षेत्र का ‘ऑयल मेजर’ प्रस्तावित।

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