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आर्थिक समीक्षा 2016-17: जीएसटी से साझा भारतीय बाजार निर्माण की उम्मीद

संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में कहा गया है कि सुदृढ़ वृहत आर्थिक स्थिरता की पृष्‍ठभूमि में वर्ष के दौरान दो प्रमुख घरेलू नीतिगत घटनाएं हुई हैं। इनमें से एक है... संविधान संशोधन पारित होने से ऐतिहासिक वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने का मार्ग प्रशस्‍त होना और दूसरी है दो बड़े नोटों का विमुद्रीकरण।

नई दिल्ली : संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में कहा गया है कि सुदृढ़ वृहत आर्थिक स्थिरता की पृष्‍ठभूमि में वर्ष के दौरान दो प्रमुख घरेलू नीतिगत घटनाएं हुई हैं। इनमें से एक है... संविधान संशोधन पारित होने से ऐतिहासिक वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने का मार्ग प्रशस्‍त होना और दूसरी है दो बड़े नोटों का विमुद्रीकरण। समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि जीएसटी से एक साझा भारतीय बाज़ार का निर्माण होगा और कर अनुपालन एवं प्रशासन तथा निवेश और आर्थिक वृद्धि में सुधार होगा तथा यह भारत के सहकारी संघवाद के प्रबंधन में एक नया ठोस प्रयोग है।

केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में प्रस्‍तुत आर्थिक समीक्षा 2016-17 में यह भी कहा गया कि वर्तमान में जारी वैश्विक मंदी के बावजूद मजबूती बनी रही है। 

आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 के अनुसार विमुद्रीकरण की लागत अल्‍पकालिक है और इससे दीर्घकालिक लाभ प्राप्‍त होंगे। सरकार ने इन लाभों को अमली जामा पहनाने के लिए अनेक अनुवर्ती उपाय किए हैं, इनमें पुन: मुद्रीकरण, करों में और सुधार आदि शामिल हैं। उम्‍मीद की जा रही है कि इन उपायों से 2017-18 में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। जिससे यह भी संभव है कि 2016-17 में आई अस्‍थायी कमी के बाद अगले वित्‍त वर्ष में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था विश्‍व की सबसे तेजी से विकास वाली अर्थव्‍यवस्‍था हो जाएगी।

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अमरीका में राजकोषीय प्रोत्‍साहन के कारण वैश्विक जीडीपी में बढ़ोतरी होने की संभावना है, लेकिन साथ ही यह संकेत भी दिया गया है कि इसमें बहुत जोखिम हैं।    

रिपोर्ट के अनुसार लघु अवधि की प्रमुख बृहत्-आर्थिक चुनौती विकास के प्रमुख संचालकों के रूप में निजी निवेश और निर्यात को पुन: स्‍थापित करना और सरकारी एवं निजी खपत पर निर्भरता कम करना है। इसमें कहा गया है कि अत्‍यधिक ऋण-ग्रस्‍त कंपनियों के दोहरे तुलनपत्रकों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के खराब ऋणों के बढ़ते बोझ की समस्‍या हल करना भी अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को जनसांख्यिकीय दृष्टि से लाभ प्राप्‍त होने की संभावना है, चूंकि अगले तीन वर्षों में भारत की काम करने योग्‍य आबादी में तीन गुणा बढ़ोतरी होने जा रही है। अगले पांच वर्षों में यह जनसांख्यिकीय लाभ अपने चरम पर पहुंच जाएगा।  

रिपोर्ट के अनुसार स्‍वच्‍छ भारत अभियान गंभीर नीति का हिस्‍सा है, जिसका लक्ष्‍य सुरक्षित और पर्याप्‍त सफाई सुविधाएं, जलआपूर्ति और स्‍वच्‍छता की व्‍यवस्‍था करना है।

खास बातें

केन्‍द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2016-17 के लिए स्थिर बाजार मूल्‍यों पर जीडीपी की विकास दर 7.1 प्रतिशत है, जो कि 2015-16 के दौरान 7.6 प्रतिशत थी। यह अनुमान मुख्‍य रूप से चालू वित्‍त वर्ष के पहले सात-आठ महीनों की सूचना पर आधारित है। सरकार का अंतिम उपभोग व्‍यय चालू वर्ष में जीडीपी विकास का बड़ा वाहक रहा है।

जीडीपी अनुपात (वर्तमान मूल्‍यों पर) में स्‍थायी निवेश (सकल स्‍थायी पूंजी निर्माण) 2016-17 में 26.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि 2015-16 में 29.3 प्रतिशत था।

साल 2017-18 के लिए अनुमान है कि आर्थिक विकास अब सामान्‍य हो जाएगा क्‍योंकि नए नोट आवश्‍यक मात्रा में चलन में वापस आ गए हैं और विमुद्रीकरण पर आगे की कार्रवाई की गई है। शेष के बारे में संभावना है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था 2017-18 में 6 ¾ प्रतिशत से 7 ½  प्रतिशत तक वापस आ जाएगी।

अप्रैल-नवम्‍बर 2016 के दौरान अप्रत्‍यक्ष करों में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

अप्रैल-नवम्‍बर 2016 के दौरान राजस्‍व व्‍यय में मजबूत वृद्धि को मुख्‍य रूप से सातवें वेतन आयोग के कार्यान्‍वयन तथा पूंजी परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए अनुदानों में 39.5 प्रतिशत वृद्धि के कारण बढ़ावा मिला।

उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी गई मुद्रास्‍फीति लगातार तीसरे वित्‍त वर्ष के दौरान नियंत्रण में बनी रही। औसत सीपीआई मुद्रास्‍फीति दर 2014-15 के 5.9 प्रतिशत से घटकर 2015-16 के दौरान 4.9 प्रतिशत पर आ गई तथा अप्रैल-दिसम्‍बर 2015 के दौरान 4.8 प्रतिशत पर बनी रही।

थोक मूल्‍य सूचकांक (डब्‍ल्‍यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्‍फीति दर 2014-15 के 2.0 प्रतिशत से गिरकर 2015-16 में (-) 2.5 प्रतिशत पर आ गई और अप्रैल-दिसम्‍बर 2016 के दौरान इसका औसत 2.9 प्रतिशत रहा।

मुद्रास्‍फीति दर में खाद्य वस्‍तुओं के संकीर्ण समूह से अकसर बढ़ावा मिलता है और इनमें दालों की खाद्य मुद्रास्‍फीति में बड़ी भूमिका रही है।

सीपीआई आधारित मुद्रास्‍फीति दर चालू वित्‍त वर्ष के दौरान स्थिर बनी रही है और इसका औसत लगभग 5 प्रतिशत रहा है।

नकारात्‍मक निर्यात वृद्धि का रुझान 2016-17 (अप्रैल-दिसम्‍बर) के दौरान कुछ हद तक परिवर्तित हुआ और निर्यात 0.7 प्रतिशत बढ़कर 198.8 बिलियन तक पहुंच गया।

साल 2016-17 की पहली छमाही के दौरान चालू खाता घाटा 2015-16 की पहली छमाही के 1.5 प्रतिशत से घटकर जीडीपी के 0.3 प्रतिशत पर आ गई।

सितम्‍बर 2016 के आखिर में भारत का विदेशी कर्ज 484.3 अरब डॉलर था जो कि मार्च 2016 के आखिर के स्‍तर की तुलना में 0.8 अरब डॉलर कम रहा।

कृषि क्षेत्र के 2016-17 के दौरान 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्‍मीद है, जो कि 2015-16 के दौरान 1.2 प्रतिशत थी। 

साल 2016-17 के लिए 13.01.2017 तक रबी फसलों के तहत कुल क्षेत्र 616.2 लाख हेक्‍टेयर रहा जो कि पिछले वर्ष के इस सप्‍ताह की तुलना में 5.9 प्रतिशत अधिक है।

साल 2016-17 के लिए 13.01.2017 तक चना दाल के तहत कुल क्षेत्र पिछले वर्ष के इस सप्‍ताह की तुलना में 10.6 प्रतिशत अधिक रहा।

औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि दर के 2016-17 के दौरान 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो कि 2015-16 के दौरान 7.4 प्रतिशत थी।

सेवा क्षेत्र के 2016-17 के दौरान 8.9 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्‍मीद है।

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