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किसानों को खेती में प्रवृत्त रखने की कठिन चुनौती

खाद्य एवं कृषि संगठन का एक आकलन है कि भूख, गरीबी और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले मौसमी बदलाव की वजह से लगभग 763 मिलियन लोग अपने ही देश में किसानी छोड़कर बेहतर आजीविका अवसरों की तलाश में प्रवास कर जाते है। भारत की लगभग एक तिहाई आबादी यानी 300 मिलियन से अधिक लोग ऐसे ही प्रवासी हैं।

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बदल रही है सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका...

आजादी के समय 1947 में, भारत में महज 29 करोड़ रुपये के निवेश के साथ केवल पांच केन्‍द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम थे। इसके अलावा,  ब्रिटिश हुक्‍मरानों को सेवाएं प्रदान करने के लिए संभवत: भारत के पास रेलवे और विस्‍तृत डाक एवं तार विभाग का काफी हद तक पर्याप्‍त नेटवर्क था, जो पूरे देश को कवर करता था।

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अचल संपत्ति क्षेत्र में सुधार और विनियमन की वजह बन सकता है रेरा

अचल संपत्ति से संबंधित कानून ‘रेरा’ को अधिसूचित करने के लिए राज्‍यों को दी गई तीन महीने की मोहलत जुलाई में खत्‍म होने के साथ ही देश में रीअल एस्‍टेट और आवास क्षेत्र में बदलाव का रास्‍ता साफ हो गया। यह मोहलत ऐसी परियोजनाओं की वजह से दी गई थी जिनका निर्माण कार्य चल रहा है और अब मोहलत की अवधि बीत जाने पर अचल संपत्ति और आवास क्षेत्र के परिपक्‍व, पेशेवर, संगठित और पारदर्शी तरीके से काम करने वाले क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आने की संभावना है जिससे सभी सम्‍बद्ध पक्षों को फायदा होगा।

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रेरा से मकान खरीदारों को मिलेगी राहत...

पहली मई से देशभर में रेरा यानी रियल इस्टेट रेग्युलेशन बिल लागू है। इसे आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने निजी बिल्डर्स और डेवलपर्स पर लगाम कसने के लिए तैयार किया गया है। संसद के समक्ष इसे चार साल पहले लाया गया था। इस विधेयक के आधार पर राज्यों को कानून बनाने का जिम्मा दिया गया।

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