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रक्षाबंधन पर इस बार बांधिए पौधे के रूप में उगाई जा सकने वाली राखी

रक्षाबंधन पर इस बार बांधिए पौधे के रूप में उगाई जा सकने वाली राखीनई दिल्ली : जनजातीय मामलों के मंत्रालय के स्वायत्त संगठन ट्राइफेड ने इस रक्षाबंधन पर पर्यावरण अनुकूल राखियों की बिक्री करने की योजना बनाई है। राखियों के अलावा इस अवसर पर विशेष पारम्परिक परिधानों की बिक्री भी की जा रही है।

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जीएसटी का सर्वोत्‍तम नतीजा आना अभी बाकी...

जीएसटी का सर्वोत्‍तम नतीजा आना अभी है बाकी...नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने रविवार को पहला जीएसटी दिवस मनाया। प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर केन्‍द्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वस्‍तु एवं सेवा कर ने लोगों को कर चोरी किए बगैर ही पारदर्शी ढंग से कारोबार करने के लिए प्रेरित किया।

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प्रसाद, लंगर या भंडारा सामग्री पर जीएसटी का अपना हिस्‍सा लौटाएगा केंद्र

प्रसाद, लंगर या भंडारा सामग्री पर जीएसटी का अपना हिस्‍सा लौटाएगा केंद्रनई दिल्ली : संस्‍कृति मंत्रालय ने वित्‍त वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए कुल 325 करोड़ रुपये की लागत से ‘सेवा भोज योजना’ नामक नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत भोजन, प्रसाद, लंगर और भंडारे के लिए घी, तेल, आटा, मैदा, रवा, चावल, दाल, चीनी, बूरा, गुड जैसी कच्‍ची सामग्री की खरीदारी पर केन्‍द्रीय वस्‍तु और सेवाकर (सीजीएसटी) और एकीकृत वस्‍तु और सेवाकर (आईजीएसटी) का केन्‍द्र सरकार का हिस्‍सा लौटा दिया जाएगा।

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ग्रामीण विकास क्षेत्र के बजट प्रावधान, कितने होंगे कामयाब…!

साल 2012-13 के 50,162 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान से साल 2017-18 में ग्रामीण विकास विभाग का आबंटन 109042.45 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसके अलावा 2017-18 के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के कार्यक्रमों के लिए पीएमजीएसवाई तथा पीएमएवाई में उच्चतर वित्त आयोग अनुदान तथा राज्य के अधिक भागीदारी भी उपलब्ध थी। कुल मिलाकर यह सब 2012-13 में उपलब्ध कुल निधि से लगभग तीन गुना है। बढ़े हुए वित्तीय प्रावधान के अतिरिक्त, ग्रामीण विकास ने सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना-2011 (एसईसीसी-2011), आईटी / डीबीटी भुगतान प्रणाली, लेन-देन आधारित कार्यक्रम एमआईएस तथा सम्पदाओं के जियो-टेगिंग के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दूरगामी प्रशासनिक व्यवस्था शुरू की है।बीते दिन पेश हुए बजट में सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र विकास के लिए अपनी थैली खोली है। यह कहा जा सकता है कि संभवत: पहली बार किसी बजट में गांवों को केंद्र में रखा गया है। यहां तक कि इसके लिए इस बार मध्यम वर्ग को भी एक तरह से दरकिनार कर दिया गया है। अब तक यह माना जाता था कि मध्यम वर्ग को खुश रखकर ही वोट हासिल किए जा सकते हैं। इसे ध्यान में रखें तो अगले वर्ष चुनावों का सामना करने जा रही मोदी सरकार का यह बड़ा और नई तरह का दांव माना जा सकता है। लेकिन, सवाल यह है कि ग्राम्य विकास के इन प्रावधानों को सरकार कितना पूरा कर पाएगी...?

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