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'असम आंदोलन के पीछे था आरएसएस का हाथ'

'असम आंदोलन के पीछे था आरएसएस का हाथ'गुवाहाटी : असम विधानसभा चुनाव बीत गया और अब सिर्फ नतीजों का इंतज़ार है लेकिन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई हैं जो अभी भी बीजेपी और खासकर डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की आलोचना करने से नहीं चूक रहे हैं । इस बार उन्होंने असम आंदोलन को लेकर अब तक का सब से तीखा और ऐसा विस्फोटक बयान दिया है जो असम के साथ साथ देशभर में राजनैतिक भूचाल ला सकता है।

तरुण गोगोई ने शनिवार को छह साल लंबे असम आंदोलन पर बयान देते हुए कहा कि “विदेशियों के खिलाफ इस आंदोलन के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का हाथ था।” गोगोई ने आरोप लगाया कि “1979 से 1985 तक चला आंदोलन दरअसल सभी विदेशियों के खिलाफ था लेकिन बाद में आंदोलन के नेताओं ने इसे बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ मोड़ दिया।"

हमारे नॉर्थ-ईस्ट के सहयोगी प्रकाशन NESamachar.in के अनुसार, गोगोई ने आरोप लगाया कि इन सबके पीछे आरएसएस का ही हाथ था। “बीजेपी नेता अटल बिहारी वाजपेयी और अरुण शौरी के नेतृत्व में इसे अंजाम दिया गया। आरएसएस ने ही आंदोलन के लिए धनराशि मुहैया कराई थी। आरएसएस यहां के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करना चाहता है। आरएसएस एक बार फिर उन पुराने जख्मों को कुरेदने की कोशिश कर रहा है।” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि “बांग्लादेशियों के शिनाख्तीकरण और उनके बहिष्कार का आधार वर्ष 1971 की जगह 1951 करने की यह चाल पूर्व मंत्री तथा मौजूदा बीजेपी नेता डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की है। यह उन्हीं के दिमाग की उपज है। हालांकि, गोगोई ने 1971 का समर्थन करने वाले आसू के मौजूदा नेताओं की सराहना भी की।

मुख्यमंत्री गोगोई की यह विस्फोटक टिप्पणी राजनीतिक हलकों में खलबली मचा सकती है। सवाल यह है कि किस आधार पर गोगोई ने यह बयानबाजी की है? क्या गोगोई की यह बयानबाजी हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ राजनीतिक रंजिश का नतीजा है या सच में मुख्यमंत्री ने किसी आधार पर यह आरोप लगाया है?

Last modified onSunday, 17 April 2016 20:14
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