मथुरा समाचार

मथुरा (260)

वृंदावन में रह रहीं विधवा महिलाओं में लगभग 25 फीसदी महिलाओं की हड्डियां खोखली हैं। लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं डायबिटिक और 60 प्रतिशत एनिमिक हैं। इतना ही नहीं, 60 फीसदी महिलाओं को पेट से सम्बंधिक कोई न कोई समस्या है।

वृंदावन : वृंदावन में रह रहीं विधवा महिलाओं में लगभग 25 फीसदी महिलाओं की हड्डियां खोखली हैं। लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं डायबिटिक और 60 प्रतिशत एनिमिक हैं। इतना ही नहीं, 60 फीसदी महिलाओं को पेट से सम्बंधिक कोई न कोई समस्या है। यह निष्कर्ष फोग्सी (फैडरेशन ऑफ ओब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया) व क्लब 35 प्लस द्वारा भजनाश्रम में लगाए गए शिविर में सामने आया।

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आस्तिकों के लिए परेशानी का सबब बना नास्तिकों का सम्मेलन

वृन्दावन : एक तरफ ‘आस्तिक’ धर्म और आस्था को लेकर दुनियाभर में धार्मिकस्थलों पर जाकर शीश नवाते हैं वहीं, धर्म को न मानने वाले ‘नास्तिकों’ की नजर में यह मात्र मनोरंजन का साधन और अन्धविश्वास को बढ़ावा देने वाला होता है। इसी नेपथ्य में यहां आयोजित होने वाले नास्तिकों के एक सम्मेलन को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है और फिलहाल इसे रद्द माना जा रहा है। 

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डॉ. वागीश दत्त गौतम को वर्ष 2015 –16 के दौरान मथुरा नगर स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों एवं उपक्रमों में हिंदी कार्यान्वयन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य सुनिश्च‍ित करने के कारण  हिंदी दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

मथुरा : डॉ. वागीश दत्त गौतम को वर्ष 2015 –16 के दौरान मथुरा नगर स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों एवं उपक्रमों में हिंदी कार्यान्वयन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य सुनिश्च‍ित करने के कारण  हिंदी दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

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कान्हा के जन्म के उल्लास में बृजवासी देर रात तक खुशियों से झूमते रहे। न केवल बृजवासी बल्कि देश के कोने-कोने से आए कृष्णभक्त बृज के मंदिरों, सड़कों, गलियों और बाजारों में भगवान के जन्म के इंतजार में सांवली हुई बृज छटा को देखकर अभिभूत दिखे।मथुरा : कान्हा के जन्म के उल्लास में बृजवासी देर रात तक खुशियों से झूमते रहे। न केवल बृजवासी बल्कि देश के कोने-कोने से आए कृष्णभक्त बृज के मंदिरों, सड़कों, गलियों और बाजारों में भगवान के जन्म के इंतजार में सांवली हुई बृज छटा को देखकर अभिभूत दिखे। 

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आखिर उन मासूमों की क्या गलती थी जो एक पत्थरदिल मां-बाप सिर्फ शारीरिक रूप से अक्षम होने की वजह से अपने कलेजे के टुकड़ों को वृन्दावन में छोड़कर रफूचक्कर हो गए। दोनों बच्चे किंकर्तव्यविमूढ़ हो स्वयं को देखने वाले अजनबियों में अपने अपनों को तलाश रहे हैं।मथुरा : आखिर उन मासूमों की क्या गलती थी जो एक पत्थरदिल मां-बाप सिर्फ शारीरिक रूप से अक्षम होने की वजह से अपने कलेजे के टुकड़ों को वृन्दावन में छोड़कर रफूचक्कर हो गए। दोनों बच्चे किंकर्तव्यविमूढ़ हो स्वयं को देखने वाले अजनबियों में अपने अपनों को तलाश रहे हैं। 

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