Menu

 

English Edition

ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की ली शपथ Featured

विरासत सप्ताह पर आयोजित एक गोष्ठी में वक्ताओं ने ऐतिहासिक इमारतों के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बरक़रार रखने व धार्मिक कट्टरपन से संरक्षित करने की अपील की।आगरा : विरासत सप्ताह पर आयोजित एक गोष्ठी में वक्ताओं ने ऐतिहासिक इमारतों के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बरक़रार रखने व धार्मिक कट्टरपन से संरक्षित करने की अपील की।

रिवर कनेक्ट अभियान और ब्रज मंडल हेरिटेज कंजर्वेशन सोसाइटी द्वारा आयोजित गोष्ठी में ताज महल जैसी इमारतों पर धार्मिक कट्टरपन और सांप्रदायिक उन्माद से उत्पन्न खतरों के प्रति सचेत किया गया।

विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि भारत की महत्पूर्ण और लोकप्रिय इमारतें यमुना नदी के किनारे स्थापित हैं लेकिन यमुना में प्रदूषित जल प्रवाहित हो रहा है जिससे इन इमारतों के संरक्षण के लिए खतरा पैदा हो गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता हुतेंद्र पाल सिंह ने ग्यारह सीढ़ी क्षेत्र के संरक्षण का मुद्दा उठाया। शीशपाल गौतम ने बुढ़िया के ताल के संरक्षण की जरूरत बताई। रजनीश वर्मा ने कहा कि शहरवासी अपनी धरोहरों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। प्रशांत पचौरी ने कहा कि नई पीढ़ी को विरासत का महत्व समझकर लुप्त हो रही ऐतहासिक संपदा को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। सुनीता दिवाकर और नेहा पाल ने पच्चीकारी, जरदोज़ी में लगे हुनरमंद कारीगरों की समस्या उठाई। लक्ष्मी नारायण ने यमुना पर अनेक छोटी-छोटी बुर्जियों और इमारतों के संरक्षण की जरूरत बताई। जगन प्रसाद ने कहा इतिहास से बेरुखी किसी भी समाज के लिए खतरे की घंटी है। पं. शीलेश शर्मा का कहना था कि विश्व हेरिटेज मोनूमेंट्स के अलावा भी आगरा में बहुत कुछ है जिसका संरक्षण और संवर्धन वक़्त की मांग है। मीनू वर्मा ने कहा कि जो समाज अपने इतिहास और धरोहरों के बारे में उदासीन होता है वह बेहद गरीब समाज है। राजदीप ने अपील की कि हम सब संकल्प लें कि इमारतों को गन्दा नहीं करेंगे, अपने नाम नहीं लिखेंगे और न दूसरों को लिखने देंगे।

गोष्ठी के अंत में सर्वसम्मिति से प्रस्ताव पारित करके मांग की गई कि पुरातत्व विभाग अपने अधीन इमारतों के संरक्षण के लिए ज्यादा सम्बेदंशील हो व आम जन को धरोहरों के रखरखाव के बारे में अपने कार्यक्रमों के जरिए जोड़े।

भारत सरकार से मांग की गई कि अविलम्ब यमुना नदी में अविरल जल प्रवाह सुनिश्चित करे ताकि प्रदूषण का स्तर नियंत्रित किया जा सके और धूल के कणों से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
गोष्ठी की अध्यक्षता कुलदीप कुमार और संचालन पूनम पाठक ने किया।

back to top

loading...
Bookmaker with best odds http://wbetting.co.uk review site.