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'यमुना मां की सेवा करना हमारा कर्तव्य ही नहीं, धर्म है' Featured

मथुरा : किशन गंगा, दाऊ आदि घाटों के सामने निकले निर्मल जल को लेकर यमुना भक्तों में उत्साह और उमंग की लहर दौड़ रही है। 15 मई को यमुना भक्तों के द्वारा गउघाट पर यमुना प्राकृट्य महोत्सव का आयोजन किया गया।

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{/googleAds} इसमें सभी भक्तों को आशीर्वाद देने गुरू शरणानन्द महाराज गउघाट पहुंचे। यमुना प्राकृट्य महोत्सव में भाग लेने ब्रज के कई सन्त व सम्मानित विभूतियां के साथ हजारो ब्रजवासी गउघाट पर पहुंचे। कार्यक्रम के शुरुआत यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने गुरू शरणानन्द महाराज को माल्यापर्ण कर उनके द्वारा यमुना भक्तों की विनय स्वीकार कर भक्तों को सानिध्य देने के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद दिया।

गुरू शरणानन्द महाराज ने भक्तों को आर्शीवचन प्रदान करते हुए कहा कि यमुना मां की सेवा करना हमारा कर्तव्य मात्र ही नहीं वरन यह हमारा धर्म है। यमुना मां की मुक्ति व शुद्धि के लिए हमें दूसरों पर निर्भर होना त्यागना होगा और खुद आगे बढकर मां की सेवा करनी होगी।

दल के अध्यक्ष ने कहा कि हम सभी यमुना भक्त महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद करते है कि उन्होने हमारी विनय स्वीकार करते हुए हमें अपने आशीर्वचनों से अनुग्रहीत किया।

इस अवसर पर दल के उपाध्यक्ष राकेश यादव, रमेश सिसौदिया, सचिव अब्दुल जब्बार, प्रदेश अध्यक्ष डॉ अशोक अग्रवाल, तकनीकी सलाहकार डीपी चतुर्वेदी, राजेन्द्र भगत, आरपी सिंह, सोहन लाल आचार्य, विशनचन्द्र अग्रवाल, गोविन्द विछिया, पंकज चतुर्वेदी, महेन्द्र राजपूत, शरद वर्मा, त्रिलोकी व्यास, राजू पेंटर, पवन अग्रवाल, पंकज पंडित और सत्य प्रकाश शर्मा आदि उपस्थित थे।

Last modified onWednesday, 21 May 2014 14:28
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