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जनता मांगे हिसाब, कहां गया यमुना संरक्षण के लिए आया करोड़ों रुपया...?

रिवर कनेक्ट अभियान द्वारा एत्माउद्दौला व्यू पॉइंट पार्क पर यमुना की 575वीं आरती के आयोजन के दौरान यहां जुटे एक्टिविस्ट, बुद्धिजीवी और भक्तों ने एक स्वर से मांग की कि राज्य एवं केंद्र सरकारें श्वेतपत्र जारी करके पिछले 25 वर्षों में शुद्धिकरण पर किए गए खर्चों और उनसे किए गए कार्यों का संपूर्ण विवरण जनता को दें।

आगरा : रिवर कनेक्ट अभियान द्वारा एत्माउद्दौला व्यू पॉइंट पार्क पर यमुना की 575वीं आरती के आयोजन के दौरान यहां जुटे एक्टिविस्ट, बुद्धिजीवी और भक्तों ने एक स्वर से मांग की कि राज्य एवं केंद्र सरकारें श्वेतपत्र जारी करके पिछले 25 वर्षों में शुद्धिकरण पर किए गए खर्चों और उनसे किए गए कार्यों का संपूर्ण विवरण जनता को दें।

नित आरती सेवा एक अप्रैल 2015 को शहरवासियों को नदी से जोड़ने के लिए शुरू की गई थी। जन जागृति और यमुना में पूरे साल जल प्रवाह की मांग को लेकर शुरू किए गए अभियान से हज़ारों लोग जुड़ चुके हैं।

रिवर कनेक्ट के ब्रज खंडेलवाल ने कहा की यमुना के शुद्धिकरण के लिए अब तक हजारों करोड़ रुपये व्यय हो चुके हैं लेकिन परिणाम शून्य है। न प्रदूषण मुक्ति हुई है, न ही जल समस्या का कोई स्थाई निदान। अनेक योजनाएं जरूर बनी हैं लेकिन कार्यान्वयन नहीं हुआ है।

खंडेलवाल द्वारा रखे गए प्रस्ताव में मांग की गई कि यमुना के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं। जितनी तत्परता और दिलचस्पी लखनऊ एक्सप्रेसवे और संजय खान के सेवेन सिटीज प्रोजेक्ट्स में दिखाई जा रही है, उससे 100 गुना ज्यादा यमुना नदी को बचाना जरूरी है। 

मौजूद स्वयंसेवियों ने मांग की कि नदी की सफाई की पुख्ता व्यवस्था की जाए, यमुना नदी के धार्मिक, संस्कृतिक, ऐतिहासिक स्वरूप और महत्व को देखते हुए यमुना को विश्व धरोहर का दर्ज़ा दिलवाया जाए, यमुना के दोनों किनारों पर हो रहे अतिक्रमणों से मुक्ति दिलाई जाए, फ्लड प्लेन एरिया चिह्नित किया जाए, यमुना घाटों की सफाई कराई जाए व सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए, समस्त नालों को नदी में जाने से रोका जाए, जल प्रदूषण जांचने और रिपोर्ट को प्रकाशित करने की व्यवस्था की जाए, रिवर पुलिस को काम पर लगाया जाए, धोबी घाट शिफ्ट किए जाएं, ट्रांसपोर्ट कम्पनीज और उनके ट्रकों को तत्काल घाटों से हटाया जाए; ताज कॉरिडोर का मलबा हटवाकर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए तथा यमुना किनारे पब्लिक टॉयलेट्स बनाए जाए।

फिलहाल यमुना जल इतना प्रदूषित हो चुका है कि अगर कोई वैकल्पिक व्यवस्था शीघ्र नहीं की गई तो महामारी के रूप में मोतीझला, टाइफाइड और अन्य बीमारियां जैसे पीलिया आदि लोगों को ग्रसित कर लेंगी। मछलियां निरंतर मर रही हैं। कछुए व अन्य जल जीव मर चुके हैं। लगता ही नहीं है कि किसी भी सरकार को इसकी कोई चिंता है।

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