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'किशोरों को प्रॉपर्टी नहीं, ईश्वर का दिया वरदान समझें'

किशोर अभिभावकों की प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा दिया गया वह खूबसूरत वरदान होते हैं, जो हर किसी को नसीब नहीं होता... आखिर क्या कारण है जिससे बच्चे किशोर होने पर अभिभावकों से दूर भागने लगते हैं... क्यों बच्चे से किशोर होते ही माता-पिता का रुख बदल जाता है... यह कहना था डॉ. जेएस टुटेजा का।

आगरा : किशोर अभिभावकों की प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा दिया गया वह खूबसूरत वरदान होते हैं, जो हर किसी को नसीब नहीं होता... आखिर क्या कारण है जिससे बच्चे किशोर होने पर अभिभावकों से दूर भागने लगते हैं... क्यों बच्चे से किशोर होते ही माता-पिता का रुख बदल जाता है... यह कहना था डॉ. जेएस टुटेजा का। वह सेंट कॉनरेड्स स्कूल में एडोलिसेन्ट हेल्थ एकेडमी व इंडियन पीडिएट्रिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित स्कूल एजुकेशन प्रोग्राम में अभिभावकों व शिक्षकों को सम्बोधित कर रहे थे।

तीन दिवसीय एडोलेसकोन-2016 के तहत पहले दिन सेंट कॉनरेड्स स्कूल व मंद बुद्धि संस्थान में स्कूल एजूकेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। सेंट कॉनरेड्स में कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. सरोज सिंह ने फीता काटकर किया। अतिथियों का स्वागत आयोजक चेयरपर्सन डॉ. एनसी प्रजापति ने किया। यूथ मेले में लगभग एक माह से पीडिएट्रिक द्वारा ट्रेनिंग पा रहे 12 विद्यार्थियों ने स्टॉल लगाकर अपने साथियों की खान-पान, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य, मीडिया, स्कूल प्रोब्लम आदि विषयों से सम्बंधित समस्याओं का समाधान किया।

इसके उपरान्त डॉ. टुटेजा ने अभिभावकों व शिक्षकों को किशोरावस्था में किशोरों की देखभाल व समस्याओं से सम्बंधित विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि किशोरों को शतरंज में वजीर और जिन्दगी में जमीर को बचाए रखने जैसे संस्कार दें। कोल्ड ड्रिंक के जरिए किशोर शुगर और केमिकल का घोल पी रहे हैं। नारी सशक्तिकरण के दौर में किशोरियां सिगरेट और शराब पी रहीं हैं। जब से हमारे देश में जीन्स आई है, हमारे जीन भी बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि हर बच्चे की क्षमता, व्यक्तित्व अलग-अलग होते हैं। हम आम के पेड़ से सेब नहीं उगा सकते। जिन्दगी में कामयाबी का मतलब डाक्टर या इंजीनियर बनना नहीं होता। एक बार ही हार से इंसान फकीर और एक बार की जीत से सिकन्दर नहीं बन जाता। किशोरों को हर्ट नहीं उनकी हेल्प करें। 

इसके उपरान्त अलग-अलग हॉल में छात्रों को डॉ. अतुल कनिकर व छात्राओं को डॉ. रश्मि (एडोलिसेन्ट हेल्थ एकेडमी की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष) ने व्याख्यान दिया। उन्हें सेक्स, एचआईवी, एड्स, शारीरिक स्वच्छता, मानसिक स्वास्थ्य आदि से सम्बंधिक विषयों के बारे में बताकर उनके जिज्ञासा भरे सवालों का जवाब भी दिया। इस मौके पर सेंट कॉनरेड्स के प्रधानाचार्य फादर कल्याम पॉल भी मौजूद थे। टीयर्स मंद बुद्धि संस्थान में अभिभावकों व शिक्षकों को डॉ. टुटेजा ने बताया कि स्पेशल किशोरों में उसी तरह की भावनाएं और इच्छाएं होती हैं, जैसे आम किशोरों में। हां उन्हें हमारी बात एक बार में समझ नहीं आती। इसलिए धैर्य के साथ हमें उनके लिए बार-बार प्रयास करने पड़ते हैं। इस मौके पर टीयर्स की निदेशक डॉ. रीता अग्रवाल भी मौजूद थीं।

दोपहर एक बजे से फतेहाबाद रोड स्थित होटल अमर में डॉक्टरों के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया गया जिसमें डॉ. शुब्द्धा, डॉ. खिरवादकर, डॉ. राजीव मोहता, डॉ. अतुल कनिकर डॉ. पूनम भाटिया, डॉ. रश्मि गुप्ता आदि ने व्याख्यान दिया। इस मौके पर डॉ. शाहजी टी जोन, डॉ. सीपी बंसल, आर्गनाइजिंग कमेटी के सचिव डॉ. आरएन शर्मा, डॉ. सुनील अग्रवाल, संयुक्त सचिव डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राहुल पैंगोरिया, कोषाध्यक्ष डॉ. राजीव किशोर, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. योगेश दीक्षित, डॉ. प्रीति, डॉ. स्वाति, डॉ. दीप्ति अग्रवाल, डॉ. राजेश कुमार आदि मौजूद थे।

कांफ्रेंस का उद्घाटन 17 सितम्बर को फतेहाबाद रोड स्थित होटल फॉर प्वाइंट में बजे डॉ. सुषमा दुरेजा (डिप्टी कमिश्नर एडोलिसेन्ट हेल्थ भारत सरकार) करेंगी। विशिष्ट अतिथि डॉ. वीएन त्रिपाठी (महानिदेशक चिकित्सा शिक्षाउप्र सरकार) होंगे।

Last modified onFriday, 16 September 2016 21:07
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