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गणतंत्र दिवस परेड में 17 राज्य और छह मंत्रालय करेंगे झांकियों का प्रदर्शन

इस साल राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में 17 राज्य और केंद्र सरकार के छह मंत्रालय अपनी झांकियों का प्रदर्शन करेंगे। इन झांकियों में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक विकास से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में राष्ट्र की प्रगति, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रमुख विषयों का प्रदर्शन किया जाएगा।

नई दिल्ली : इस साल राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में 17 राज्य और केंद्र सरकार के छह मंत्रालय अपनी झांकियों का प्रदर्शन करेंगे। इन झांकियों में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक विकास से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में राष्ट्र की प्रगति, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रमुख विषयों का प्रदर्शन किया जाएगा। 

ओडिशा की ‘डोला जात्रा’ झांकी में राज्य में मनाए जाने वाले एक लोकप्रिय त्योहार 'डोला जात्रा' को दर्शाया गया है। यह त्योहार भक्ति पंथ की परंपरा में देवी राधा और भगवान कृष्ण की यात्रा का प्रतीक है। 'डोला जात्रा' होली के समान एक त्योहार है और इसे फरवरी-मार्च के बीच में पूर्णिमा से पूर्व फाल्गुन मास को मनाया जाता है। इस छह दिवसीय महोत्सव के दौरान देवी राधा और भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। 

अरुणाचल प्रदेश की ‘याक डांस’ झांकी याक नृत्य को प्रस्तुत करती है जो अरुणाचल प्रदेश की बौद्ध जनजातियों के महायान संप्रदाय का सबसे प्रसिद्ध स्वांग है। इस नृत्य में एक परिवार के नकाबपोश नर्तक एक जादुई पक्षी की मदद से एक याक की खोज करते हैं। याक इन जनजातियों के लिए सबसे उपयोगी बहुउद्देशीय पशु है। याक की खोज से परिवार के आंतरिक संपत्ति विवाद का समाधान होता है और पूरे समुदाय के लिए यह समृद्धि का एक स्थायी स्रोत है। इस नृत्य में याक खोजने पर लोगों की खुशी का चित्रण किया जाता है। 

इस वर्ष को स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 160वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। लोकमान्य के रूप में लोकप्रिय तिलक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेताओं में से एक थे। वह एक स्वतंत्रता सेनानी, कार्यकर्ता, समाज सुधारक, गणितज्ञ, पत्रकार, संपादक, लेखक और वक्ता थे। उन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में स्वयं की प्रतिबद्धता जताते हुए अंग्रेजों के दमनकारी शासन से भारत को मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने 'महरत्ता' और 'केसरी' नामक अपने समाचार पत्रों का प्रकाशन भी किया था। उन्होंने गणेशोत्सव और शिव जयंती उत्सव का भी शुभारंभ किया था। इस वर्ष उनके द्वारा प्रारंभ किए गए गणेशोत्सव का 125वां वर्ष भी है। महाराष्ट्र की झांकी में भारत के इस महान व्यक्तित्व की 160वीं जयंती को दर्शाया गया है।

लाइ हरोबा मणिपुर के मेइती समुदाय द्वारा संरक्षित दुनिया के सबसे पुराने कर्मकांडों में से एक है। इस उत्सव को पूरे समुदाय के द्वारा अत्यंत श्रद्धा, पवित्रता और पूरी भक्ति के साथ मनाया जाता है। 'देवताओं की खुशी' के रूप में मनाए जाने वाले लाइ हरोबा में देवताओं की पूजा करने से स्थानीय निवासियों को समृद्धि और भूमि का आशीर्वाद मिलता है। मणिपुर की झांकी में देवताओं की प्रतिकृति के साथ इस विचित्र और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को पवित्र नृत्य के साथ प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है।

गुजरात का कच्छ जिला अपनी कला और जीवन शैली के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां 16 अलग-अलग प्रकार से कढ़ाई की जाती है। रोगन कला, मिट्टी का काम और भुंगा बनाने की कला ने कच्छ को दुनियाभर में एक अद्वितीय पहचान दी है। राज्य की इस बार की झांकी का मुख्य विषय ‘कच्छ की कला और जीवन शैली' है। इसमें महिलाओं को कढ़ाई का काम करते हुए दिखाया गया है।

लक्षद्वीप की झांकी में इस राज्य को एक अनन्वेषित पर्यटन स्थल के रूप में दिखाया जाएगा। लक्षद्वीप में 36 द्वीप अरब सागर में फैले हुए हैं। 1956 में गठित हुआ भारत का सबसे नन्हा केंद्र शासित प्रदेश केरल तट से 220-440 किमी की दूरी पर स्थित है। लक्षद्वीप अपने पारिस्थितिकी तंत्र, प्रवाल भित्तियों, चांदी जैसे रेतीले समुद्र तटों, प्रदूषण रहित पर्यावरण और साहसिक खेलों के पर्यटन के लिए दुनिया में विख्यात है।

अपनी पारंपरिक कला और लोक नृत्य के लिए मशहूर, कर्नाटक राज्य इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड की झांकी में राज्य के पारंपरिक लोक नृत्य को प्रस्तुत कर रहा है। झांकी में भगवान शिव के उपासक गौरावास को पारंपरिक नृत्य करते हुए दिखाया गया है। उन्हें ड्रम और बांसुरी की धुन पर अद्वितीय टोपियों के साथ नृत्य करते हुए दर्शाया गया है। झांकी में तलवार चलानेवाले योद्धाओं का भी एक नृत्य प्रदर्शन किया गया है। 

दिल्ली की झांकी में राष्ट्र में विद्यालय शिक्षा में परिवर्तन लाते हुए गुणवत्ता बढ़ाने की हाल की पहल का चित्रण है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रयासों के तहत दिल्ली सरकार सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूलों में बदल रही है। स्कूलों के बुनियादी ढांचे को उन्नत किया गया है और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। दिल्ली की झांकी 'मॉडल स्कूल' की अवधारणा के विकास को दर्शाती है। 

चंबा रूमाल हिमाचल प्रदेश के चंबा शहर में 18वीं सदी के दौरान उत्कर्ष पहाड़ी कला का बेहतरीन नमूना है। इस कला के माध्यम से हाथ से बुने हुए कपड़ों पर रेशमी धागों से कशीदाकारी की जाती है। रासलीला, प्राचीन कथाओं और मिथकों के दृश्यों को आम तौर पर रूमालों पर प्रदर्शित किया जाता है। हिमाचल की झांकी में इस अद्भुत शिल्प कला को प्रस्तुत किया गया है। 

‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ हमारे देश का एक प्रासंगिक मुद्दा है। पहले के दिनों में लड़कियों को ज्यादातर उच्च शिक्षा नहीं दिलाई जाती थी और उनका शीघ्र विवाह कर दिया जाता था। आज भी महिलाओं को अनेक भेदभावों का सामना करना पड़ता है। कई गांवों में आज भी लड़कियों को न तो लड़कों के समकक्ष माना जाता है और न ही उन्हें प्राथमिक स्तर से परे की शिक्षा की अनुमति है। उन्हें गर्भ में ही मार दिया जाता है। यदि वे फिर भी जीवित रहती हैं तो उऩ पर कई तरह के शारीरिक शोषण और दहेज हत्या जैसे खतरे बने रहते हैं। हरियाणा राज्य की झांकी में इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।

पश्चिम बंगाल की ‘शरद उत्सव’ झांकी में ग्रामीण बंगाल की हरियाली पृष्ठभूमि को दिखाया जाएगा। शरद उत्सव को दुर्गा पूजा उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। बंगाल में शरद उत्सव एकमात्र ऐसा धार्मिक त्योहार है, जिसको न सिर्फ राज्य बल्कि भारत और दुनियाभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज यह दुनिया के सबसे बड़े कला कार्निवल में से एक बन चुका है। इसके अंतर्गत पूजा पंडालों की आतंरिक और बाहरी सजावट को विशिष्ट शैली के साथ प्रशिक्षित कलाकारों द्वारा क्रियान्वित किया जाता है। 

सदियों पहले शादी समारोह के लिए लोगों को आमंत्रित करने के लिए निमंत्रण नहीं भेजा जाता था। पंजाब में शादी की रात से एक दिन पहले जागो समारोह मनाया जाता है और यह एक जोशपूर्ण उत्सव नृत्य है। इसमें एक बर्तन में तेल के दीपक को जलाकर सिर पर रखा जाता है और फिर नृत्य और जागो गीतों को गाते हुए दुल्हन या दूल्हे के रिश्तेदार गांव के चारों ओर जाते हैं और लोगों को शादी में शामिल होने का निमंत्रण देते हैं। पंजाब की झांकी "जागो" विषय पर आधारित है।

तमिलनाडु की ‘काराकट्टम’ झांकी में इस लोकप्रिय नृत्य शैली के बारे में दिखाया जाएगा। 'काराकट्टम' इस राज्य का एक लोकप्रिय लोक नृत्य है जिसे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अम्मान मंदिर समारोह के रूप में मनाया जाता है। 'कारागम नर्तक ड्रम की धुन पर सिर पर कारागम का संतुलन बनाते हुए नृत्य करते हैं।

गोवा की झांकी में विभिन्न संगीत वाद्ययंत्र और नृत्य के माध्यम से राज्य की समृद्ध संगीत विरासत को दर्शाया गया है। 

इस बार की त्रिपुरा की झांकी में राज्य के एक शानदार रियांग आदिवासी नृत्य होजागिरी को प्रस्तुत किया गया है। इस नृत्य में 4-6 सदस्यों की महिलाएं और युवा लड़कियां गाते हुए अपने हाथ पर जलते हुए दीपक और सिर पर एक बोतल का संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ती हैं। इस नृत्य को त्योहारों के अवसर पर किया जाता है। 

इस बार जम्मू एवं कश्मीर की झांकी में गुलमर्ग शीतकालीन खेलों को दर्शाया जाएगा। 2650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बर्फ से ढका गुलमर्ग हल्की सर्दी के मौसम में एक आकर्षक शीतकालीन खेल गंतव्य है और यहां दुनियाभर के पर्यटक आते है। 

इस बार की असम की झांकी में राज्य की राजधानी गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी के पवित्र मंदिर का चित्रण किया गया है। गुवाहाटी में नीलांचल पहाड़ियों के ऊपर स्थापित, कामाख्या मंदिर को देश के सबसे बड़े शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। अम्बूबाची त्यौहार के दौरान इस मंदिर में भारत ही नहीं अपितु विदेशों से भी भक्त आते हैं। इस मंदिर में पूजा के लिए कोई छवि या मूर्ति नहीं है इसलिए कामाख्या मंदिर अन्य मंदिरों से अलग है। यहां से महिला के गुप्तांग से होने वाले प्रदर जैसे रंग का एक प्राकृतिक स्राव होता है। गुफा के अंदर एक प्राकृतिक जल प्रवाह के कारण यह नम बना रहता है। माना जाता है कि खेती के समय धरती माता इस दरार के माध्यम से स्रावित होती हैं। 

उत्पाद एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीईसी) की ‘वस्तु एवं सेवा कर’ झांकी में विभाग द्वारा किए गए सुधारों को दर्शाया जाएगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की ‘खादी भारत’ झांकी खादी और ग्रामोद्योग आयोग पर आधारित है। आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय की ‘सभी के लिए आवास’ झांकी में मंत्रालय की ओर से 25 जून 2015 को प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को दिखाया गया है। इस मिशन में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी के माध्यम से वर्ष 2022 तक हर भारतीय के लिए एक पक्के मकान की परिकल्पना की गई है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की झांकी में 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के साथ वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की वैश्विक स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। 75 वर्ष की अपनी यात्रा में सीएसआईआर देश में वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में एक अहम भूमिका निभा रहा है। सीपीडब्ल्यूडी की ‘हरित भारत - स्वच्छ भारत’ झांकी में "स्वच्छ भारत हरित भारत' की अवधारणा को दर्शाया गया है। स्वच्छ और हरित राष्ट्र के संदेश के साथ इसे भिन्न-भिन्न रंगीन फूलों से तैयार किया गया है। एक अन्य कौशल विकास मंत्रालय की ‘कौशल विकास के माध्यम से बदलता भारत’ झांकी में "कौशल विकास के माध्यम से बदलते भारत" और मंत्रालय एवं उसके कार्यक्रमों की उपलब्धि पर प्रकाश डाला गया है।

Last modified onWednesday, 25 January 2017 17:53

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