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इसलिए याद रखे जाएंगे अनंत कुमार

इसलिए याद रखे जाएंगे अनंत कुमार

इसलिए याद रखे जाएंगे अनंत कुमारअनंत कुमार एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किए जाएंगे जिन्होंने दक्षिण भारत में कांग्रेस का वर्चस्व तोड़कर भारतीय जनता पार्टी का जनाधार काफी मजबूत बनाया। सौम्य और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी अनंत कुमार बेंगलुरु के सबसे लोकप्रिय सांसद रहे।

साल 1996 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद वह लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। कभी चुनाव नहीं हारे। उनके नाम संयुक्त राष्ट्र में कन्नड़ में भाषण देने का रिकॉर्ड दर्ज है। दूसरी ओर, एक केंद्रीय मंत्री के तौर पर उन्होंने कई मंत्रालयों का कामकाज कुशलतापूर्वक संचालित किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से होकर भाजपा आए अनंत कुमार राजनीति की गहरी समझ रखते थे।

वाजपेयी मंत्रीमंडल के दौरान युवा चेहरा रहे अनंत कुमार नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते रहे।

अपनी शुरुआती शिक्षा उन्होंने मां गिरिजा शास्त्री के मार्गदर्शन में पूरी की जो खुद भी एक स्नातक थीं। पिता नारायण शास्त्री रेलवे में कर्मचारी थे। स्वयं अनंत कुमार कानून में स्नातक थे। 

उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई। वह परिषद के प्रदेश सचिव और बाद में राष्ट्रीय सचिव भी रहे।

आपातकाल के दौरान छात्र नेता के तौर पर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। इसके परिणामस्वरूप वह 30 दिन जेल में रहे।

साल 1987 में अनंत कुमार भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। पार्टी में वह महासचिव और बाद में राष्ट्रीय सचिव रहे।

साल 1996 में वह दक्षिण बेंगलुरु से लोकसभा में चुने गए। यह निर्वाचन क्षेत्र उनके निधन तक उनका मजबूत गढ़ बन रहा।

अनंत कुमार ने कई ऐसे योगदान दिए हैं जिनकी वजह से वह हमेशा याद रखे जाएंगे। उन्हें देश का पहला हाई टेक राजनेता माना जाता है। डिजिटल दुनिया की क्षमता को सबसे पहले उन्होंने साल 1998 में पहचाना था। वह देश के पहले ऐसे राजनेता थे जिन्होंने अपनी निजी वेबसाइट लांच की थी।            

सेहत के क्षेत्र में उनका योगदान स्टेंट की कीमतों को बहुत ज्यादा घटा देने के लिए याद रखा जाएगा। उन्होंने दिल के स्टेंट की कीमत को 85 फीसदी और घुटना प्रत्यारोपण की कीमत को लगभग 70 फीसदी तक घटा दिया।

अनंत कुमार के मंत्रालय ने यूरिया पर 100 फीसदी नीम आवरण चढ़ा देने का फैसला लिया। इससे इसकी धांधली रुकी और सरकार के तकरीबन दस हजार करोड़ रुपये बचे।

अनंत कुमार ने इसी साल जून में सुविधा कैंपेन शुरू कराया था जिसका लक्ष्य ढाई रुपये में महिलाओं को बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन मुहैया करवाना था।

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